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गणतंत्र दिवस पर भी सियासी बवाल, 26 जनवरी की परेड में नहीं शामिल होंगी महाराष्ट्र,पश्चिम बंगाल की झांकी,

नए साल की शुरू बाद होते ही गणतंत्र दिवस के जश्न की तैयारियां भी चालू हो गई हैं . देश की राजधानी दिल्ली में 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर सालाना परेड होगी, जिसमें भारतीय सेना का दमखम दुनिया देखेगी. इस परेड में भारत की सैन्य शक्ति के अलावा संस्कृति को भी दिखाया जाता है, जिसमें राज्यों और मंत्रालयों की झांकियां निकाली जाती हैं. इस बार पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र की झांकी इस परेड में नहीं देखने को मिलेगी. इसे लेकर अब राजनीतिक बवाल भी शुरू हो गया है.

परेड में महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल की झांकी शामिल न करने को लेकर अब सियासी घमासान मच गया है. एक तरफ, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) और शिवसेना ने मोदी सरकार पर गणतंत्र दिवस परेड के लिए महाराष्ट्र की झांकी की अनुमति नहीं देने के लिए निशाना साधा है. तो दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस भी हमलावर हो गई है. एनसीपी ने इसे राज्य की जनता का अपमान बताया. एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने गुरुवार को दावा किया कि केंद्र ने गणतंत्र दिवस परेड के लिए गैर-भाजपा शासित महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल की झांकियों को अनुमति नहीं दी है.

उन्होंने केंद्र सरकार पर पूर्वाग्रह से ग्रस्त होने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों ने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और उनकी झांकियों को अनुमति नहीं देना लोगों का ‘अपमान’ जैसा है. सुप्रिया सुले ने ट्वीट किया, ‘केंद्र ने गणतंत्र दिवस पर परेड के लिए महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल की झांकियों को अनुमति नहीं दी है. यह देश का पर्व है और केंद्र से सभी राज्यों को प्रतिनिधित्व देने की उम्मीद है। लेकिन सरकार पक्षपातपूर्ण तरीके से व्यवहार कर रही है और विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों से सौतेला व्यवहार कर रही है.’ वहीं, शिवसेना के राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने एक समाचार चैनल से कहा, ‘आपको बताना होगा कि दो राज्यों की झांकियों को मंजूरी क्यों नहीं दी गयी.

वहीं दूसरी तरफ, तृणमूल कांग्रेस ने बीजेपी नीत और केंद्र सरकार पर हमला बोला और आरोप लगाया कि संशोधित नागरिकता कानून का विरोध करने के कारण राज्य के लोगों का अपमान किया गया. हालांकि  बीजेपी  ने इस पर तुरंत पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि तृणमूल सरकार ने नियमों एवं प्रक्रियाओं का सही तरीके से पालन नहीं किया और इसी कारण यह प्रस्ताव खारिज किया गया है

बता दें कि गणतंत्र दिवस की परेड की पूरी जिम्मेदारी रक्षा मंत्रालय के पास होती है. जो इसकी तैयारियां, सुरक्षा, परेड, झांकी आदि की व्यवस्था को देखते हैं. क्योंकि इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि देश के राष्ट्रपति होते हैं जो कि तीनों सेनाओं के प्रमुख भी हैं इसलिए सारी जिम्मेदारी रक्षा मंत्रालय अपने पास ही रखता है. और परेड में झांकियों की प्रदर्शनी के लिए सभी राज्यों, केंद्रीय मंत्रालयों और केंद्र शासित प्रदेशों की तरफ से सुझाव मांगे जाते हैं. जिसके बाद एक चयन प्रक्रिया के तहत एक कमेटी फाइनल लिस्ट तैयार करती है. जो भी प्रस्ताव राज्यों या मंत्रालयों की तरफ से आते हैं, उनके आधार पर एक एक्सपर्ट कमेटी कई दौर की बैठक के बाद उनका चयन करती है. इस कमेटी में कल्चर, पेंटिंग, संगीत, कृषि, कोरियोग्राफी, कला समेत अन्य क्षेत्रों के एक्सपर्ट शामिल होते हैं,

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