न्यायमूर्ति शंपा सरकार की अध्यक्षता वाली कलकत्ता उच्च न्यायालय की एक नई पीठ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की उस याचिका पर सुनवाई करेगी जिसमें नंदनीग्राम निर्वाचन क्षेत्र के विधानसभा चुनाव परिणामों को चुनौती दी गई है.  हाई कोर्ट के सूत्रों के मुताबिक इस हफ्ते बुधवार या गुरुवार को मामले की सुनवाई होगी. न्यायमूर्ति कौशिक चंदा द्वारा 7 जुलाई को ममता की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग करने के बाद यह बात सामने आई है.

ममता ने आरोप लगाया था कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कानूनी प्रकोष्ठ के साथ एक वकील के रूप में न्यायमूर्ति चंदा के लंबे समय से जुड़ाव ने ‘पक्षपात की आशंका’ पैदा की.  इससे पहले उन्होंने जज बदलने की भी गुहार लगाई थी. ममता की अपील पर 18 जून को न्यायमूर्ति कौशिक चंदा की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई की. हालांकि, याचिकाकर्ता ममता बनर्जी ने एक वकील के रूप में भाजपा के साथ उनके पिछले जुड़ाव के कारण न्यायमूर्ति चंदा के बारे में संदेह जताया। 7 जुलाई को, न्यायमूर्ति चंदा ने मामले से खुद को अलग कर लिया ताकि विवाद को न बढ़ाया जा सके और ममता बनर्जी पर ‘न्यायपालिका को खराब रोशनी में रखने’ के लिए 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया.

बता दें कि ममता ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 में नंदीग्राम निर्वाचन क्षेत्र से अपने प्रतिद्वंद्वी और भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी की जीत को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर की है. भारत के चुनाव आयोग ने 2 मई को नंदीग्राम निर्वाचन क्षेत्र के लिए जमकर लड़े चुनाव में अधिकारी की जीत को 156 मतों से घोषित किया था. नंदीग्राम सीट से अपनी हार के बाद, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ने आरोप लगाया कि विधानसभा सीट के रिटर्निंग ऑफिसर ने वोटों की उचित गणना सुनिश्चित नहीं की और उन्हें वोटों की दोबारा गिनती नहीं करने की धमकी दी गई.

अधिकारी से नंदीग्राम सीट हारने के बावजूद, ममता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बनीं क्योंकि मौजूदा टीएमसी ने कुल 294 सीटों में से 213 सीटों पर जीत दर्ज की। दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी बीजेपी ने 77 सीटों पर जीत हासिल की. टीएमसी ने बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी से नंदीग्राम निर्वाचन क्षेत्र में वोटों और डाक मतपत्रों की तुरंत फिर से गिनती करने का अनुरोध किया। हालांकि, अनुरोध को अस्वीकार कर दिया गया था. बाद में टीएमसी ने कलकत्ता हाई कोर्ट में केस दायर किया और ममता की याचिका पर पहली सुनवाई 18 जून को हुई.