संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने देशव्यापी विरोध का आह्वान किया है क्योंकि किसान आंदोलन को अब 11 महीने पूरे हो गए हैं। विवरण के अनुसार, मंगलवार को सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक तहसील और जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन की योजना है. एक आधिकारिक बयान में एसकेएम ने कहा है कि यह मुख्य रूप से लखीमपुर खीरी घटना के संबंध में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी की गिरफ्तारी और बर्खास्तगी की मांग करने के लिए है।

एसकेएम ने कहा ये विरोध भारत के राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन के साथ समाप्त होगा, जिसे जिला कलेक्टरों  मजिस्ट्रेटों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में 3 अक्टूबर को हुई हिंसा में चार किसानों समेत कुल आठ लोगों की मौत हो गई थी. घटना के सिलसिले में तेनी के बेटे आशीष मिश्रा और 12 अन्य को गिरफ्तार किया गया है.

स्थानीय किसानों ने हिंसा के लिए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा ‘तेनी’ और उनके बेटे को जिम्मेदार ठहराया। उत्तर-मध्य उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में मंत्री के काफिले का हिस्सा रहे एक वाहन ने उन्हें कथित तौर पर कुचल दिया।

किसान मोर्चा की ओर से इन मांगों को लेकर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के नाम एक ज्ञापन  भी भेजा जाएगा। बता दें कि राष्ट्रपति कोविंद को भेजे जाने वाले ज्ञापन में लिखा गया है, 3 अक्टूबर 2021 को हुए लखीमपुर खीरी किसान हत्याकांड में जिस तरीके से जांच की जा रही है उससे पूरा देश निराशा और आक्रोश में है। सुप्रीम कोर्ट इस घटना को लेकर पहले ही कई प्रतिकूल टिप्पणी कर चुका है।

ज्ञापन में कहा गया है, मंत्री ने  प्रदर्शनकारी किसानों के खिलाफ भड़काऊ और अपमानजनक भाषण भी दिया था. वास्तव में, उन्होंने वीडियो में अपने संदिग्ध (आपराधिक) पूर्ववृत्त का उल्लेख करने में भी संकोच नहीं किया. एसआईटी की ओर से मुख्य आरोपी को समन जारी करने के बाद मंत्री ने शुरू में आरोपियों को पनाह भी दी.

बता दें हालांकि अजय मिश्रा टेनी ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा था कि उनका बेटा घटना स्थल पर मौजूद नहीं था। आशीष ने वही दोहराया और आरोपों का खंडन किया। बाद में मामले में आशीष मिश्रा समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

एसकेएम ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र ने एनआरआई दर्शन सिंह धालीवाल, जो किसान आंदोलन के प्रबल समर्थक थे, शिकागो से आने के बाद भारत में प्रवेश नहीं करने दिया। एसकेएम ने कहा उन्हें देश में आने की अनुमति दिए बिना वापस भेज दिया गया था। भारत सरकार का अलोकतांत्रिक और सत्तावादी व्यवहार अस्वीकार्य है और हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं।