राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में गुरुवार (18 नवंबर, 2021) की वायु गुणवत्ता में मामूली सुधार देखा गय, 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) एक दिन पहले 403 से 375 दर्ज किया गया। हालांकि, यह अभी भी ‘बहुत खराब’ श्रेणी में बना हुआ है।

साथ ही दिल्ली के अलावा, फरीदाबाद (378), गाजियाबाद (361), ग्रेटर नोएडा (362), गुरुग्राम (344) और नोएडा (356) वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज की। वहीं इस बीच  केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसके पैनल ने प्रदूषण के मुद्दे को हल करने के लिए दिल्ली और उत्तर भारत के अन्य राज्यों के साथ चर्चा की और इस संबंध में उपाय करने का सुझाव दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों पर भारी पड़ते हुए पूछा कि उन्होंने प्रदूषण को रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं। अदालत ने नौकरशाही पर निर्णय न लेने और उन्हें अदालतों पर छोड़ने का भी आरोप लगाया।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण को रोकने के लिए सख्त कदम उठा रहा है. इसमें सभी सार्वजनिक और निजी शैक्षणिक संस्थानों को पूरी तरह से बंद करना, कुछ अपवादों को छोड़कर ट्रकों के प्रवेश पर प्रतिबंध और राष्ट्रीय राजधानी के 300 किलोमीटर के दायरे में छह ताप विद्युत संयंत्रों को बंद करना शामिल है।

इस बीच दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने बुधवार को वायु प्रदूषण को नियंत्रण में रखने के लिए आप सरकार द्वारा उठाए गए कई घोषणा की। प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए राय ने कहा कि दिल्ली सरकार के कर्मचारियों के लिए रविवार तक शत-प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम (डब्ल्यूएफएच) होगा। राय ने कहा हमने आवश्यक सेवाओं में शामिल लोगों को छोड़कर, दिल्ली में सभी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश भी दिए हैं। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री ने कहा कि स्कूल, कॉलेज, संस्थान और पुस्तकालय के साथ प्रशिक्षण केंद्र अगले आदेश तक बंद रहेंगे।