गुरुवार को जम्मू-कश्मीर की आठ राजनीतिक पार्टियों के 14 नेताओं के साथ पीएम मोदी की लगभग साढ़े तीन घंटे तक सर्वदलीय बैठक चली. जहां इस बैठक में उप राज्यपाल मनोज सिन्हा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री जीतेंद्र सिंह और एनएसए अजीत डोभाल ने भी शिरकत की. पीएम मोदी ने जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बहाली पर जोर देते हुए नेताओं से कहा कि परिसीमन का काम खत्म होते ही पूर्ववर्ती राज्य में विधानसभा चुनाव कराए जाएंगे. लंबे समय तक आतंकवाद और अस्थिरता के दौर से गुजरे जम्मू-कश्मीर के लिए प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि वह इस पूर्ववर्ती राज्य से ‘दिल्ली की दूरी’ के साथ ही ‘दिलों की दूरियों’ को मिटाना चाहते हैं.

जानकारी के मुताबिक पीएम ने कहा कि जोर देकर कहा कि डीडीसी चुनावों के सफल संचालन की तरह ही विधानसभा चुनाव कराना प्राथमिकता है. यह चर्चा की गई कि चुनाव परिसीमन के तुरंत बाद हो सकते हैं और कुल मिलाकर अधिकांश प्रतिभागियों ने इसके लिए इच्छा व्यक्त की. पीएम ने जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने और जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया ताकि उनका उत्थान सुनिश्चित हो सके.प्रधानमंत्री ने सभी प्रतिभागियों द्वारा समर्थित संविधान और लोकतंत्र के प्रति प्रतिबद्धता पर प्रसन्नता व्यक्त की.

गौरतलब है कि वर्ष 2019 में जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया गया है. सूत्रों के अनुसार, बैठक में पीएम ने सभी प्रतिभागियों के सुझावों और इनपुट को धैर्यपूर्वक सुना. उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि सभी प्रतिभागियों ने अपने स्पष्ट और ईमानदार विचार साझा किए. यह एक खुली चर्चा थी जो कश्मीर के बेहतर भविष्य के निर्माण के इर्द-गिर्द घूमती थी. 

वहीं बैठक के बाद पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने संवाददाताओं से कहा कि बैठक अच्छी रही और उन्होंने पाकिस्तान के साथ अनौपचारिक वार्ता शुरू करने के लिए प्रधानमंत्री की सराहना की. जिसके कारण नियंत्रण रेखा पर संघर्षविराम समझौता हुआ और घुसपैठ के स्तर में कमी आयी. उन्होंने कहा, ‘मैंने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है कि अगर जरूरत पड़ी तो हम शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए एक बार फिर पाकिस्तान से बात कर सकते हैं.’ अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान निरस्त करने पर महबूबा ने कहा कि उनकी पार्टी इसकी बहाली के लिए लड़ाई जारी रखेगी.