भारत सरकार ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर गलत एवं भारी छूट के साथ धोखाधड़ी रोकने के लिए ई-कॉमर्स नियमों में कई बदलाव का प्रस्ताव दिया है.  केंद्र सरकार की ओर से जारी बयान के मुताबिक जो बदलाव का प्रस्ताव दिया गया है, उनमें कुछ प्रकार की फ्लैश सेल पर बैन और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की ओर से नियमों को नहीं मानने पर कार्रवाई शामिल है.

बता दें कि बयान में कहा गया है कि नियमों में प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य पारदर्शिता लाना और नियामक व्यवस्था को मजबूत करना है. साथ ही कहा गया है, ‘कंज्यूमर प्रोटेक्शन (ई-कॉमर्स), 2020 में संशोधन के लिए विचार, टिप्पणी और सुझाव मांगे गए हैं. ई-कॉमर्स में अनुचित व्यापार प्रथाओं को रोकने के मकसद से पिछले साल 23 जुलाई से नियमों को अधिसूचित किया गया था. 

साथ  ही प्रस्तावित संशोधनों में ई-कॉमर्स संस्थाओं को किसी भी कानून के तहत अपराधों की रोकथाम, पता लगाने और जांच और अभियोजन के लिए सरकारी एजेंसी से आदेश प्राप्त होने के 72 घंटे के भीतर सूचना प्रदान करनी होगी। उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 को पहली बार पिछले साल जुलाई में अधिसूचित किया गया था. इसके उल्लंघन में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है.

वहीं सरकार ने एक बयान में कहा कि उसे पीड़ित उपभोक्ताओं, व्यापारियों और संघों से ई-कॉमर्स प्रक्रिया में व्यापक धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार प्रथाओं के खिलाफ कई शिकायत प्राप्त हुए हैं.  हालांकि मंत्रालय ने कहा कि पारंपरिक तौर पर आयोजित होने वाली ई-कॉमर्स रियायती बिक्री पर प्रतिबंध नहीं होगा. केवल विशिष्ट तौर पर ग्राहकों को घेरने के लिहाज से की जाने वाली बिक्री या बार-बार फ़्लैश बिक्री, कीमतों में वृद्धि करती है तथा सबके के लिए एक समान अवसर वाला मंच उपलब्ध कराने से रोकती है, ऐसी बिक्री की अनुमति नहीं होगी.