देश में केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के विरोध में किसान पिछले 6 महीनों से आंदोलन पर बैठे हुई हैं. वहीं कोरोना की दूसरी लहर के बीच अब किसानों ने एक बार फिर आंदोलन तेज करने का मन बना लिया है. जानलेवा कोरोना की दूसरी लहर के बीच किसान संगठनों ने कल यानि 26 मई को दिल्ली में बड़ा विरोध प्रदर्शन करने की तैयारी की है. वहीं सरकार ने कोरोना के दौरान किसानों से विरोध प्रदर्शन न करने की अपील की है. सरकार ने कहा है कि किसान ‘सुपर-स्प्रेडर’ बन सकते हैं.

जहां देश में कोरोना की दूसरी लहर खौफ बरपा रही है. वहीं ऐसे में किसानों के विरोध प्रदर्शन के एलान ने सरकार के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है. पंजाब के किसान बड़ी संख्या में दिल्ली की सीमा के लिए कूच कर रहे हैं. किसानों के प्रदर्शन के छह महीने 26 मई को पूरे हो रहे हैं और इस दिन को ‘काला दिवस’ के रूप में मनाने के लिए संगठन के आह्वान पर किसान कूच कर रहे हैं.

वहीं इस बीच भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि किसान संगठन केन्द्र के साथ बातचीत फिर शुरू करने को तैयार हैं, लेकिन यह बातचीत नये कृषि कानूनों को वापस लेने पर होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि मांगें पूरी होने से पहले किसानों के प्रदर्शन स्थल से हटने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता.

किसान आंदोलन के छह महीने पूरे होने के मौके पर संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा आहूत देशव्यापी प्रदर्शन को आम आदमी पार्टी अपना समर्थन देती है. हम केंद्र से आग्रह करते हैं कि वह तत्काल किसानों से बातचीत बहाल करे और उनकी मांगें स्वीकार करे. आप किसानों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है.’ कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, वाम दलों, समाजवादी पार्टी, राकांपा और द्रमुक समेत 12 विपक्षी दलों ने किसानों के देशव्यापी प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया है.

बता दें कि तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर किसान दिल्ली की सिंघू, टिकरी और गाजीपुर सीमा पर नवंबर से ही प्रदर्शन कर रहे हैं जबकि केंद्र सरकार का दावा है कि ये कानून किसानों के हित में हैं. किसानों और केंद्र के बीच इस मुद्दे पर 22 जनवरी से कोई बातचीत नहीं हुई है.