उत्तर प्रदेश के फतेहपुर के पास के एक गांव का रहने वाला 56 वर्षिय शिवलाल अपने परिवार सहित देहरादून में ही रहता था. जहा कल शिवलाल अपने बेटे सुभाष सहित परिवार के साथ देहरादून से लिंक एक्सप्रेस ट्रेन में बैठकर फतेहपुर के पास अपने गांव के लिए जा रहे थे. जहा चंदौसी रेलवे स्टेशन के पास पहुंचते ही सांस की बीमारी के चलते शिवलाल की ट्रेन में अचानक तबीयत बिगड़ी और उसके कुछ देर बाद तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर चलती ट्रेन में ही शिवलाल की मौत हो गई.

जहा अलीगढ़ में देर रात जीआरपी पुलिस द्वारा शिवलाल के शव को लिंक एक्सप्रेस ट्रेन से उतारा गया. मृतक का बेटा व पुत्रवधू भी उसके साथ थे. बेटा काफी देर तक प्लेटफॉर्म पर एंबुलेंस की गुहार लगाता रहा. लेकिन पुलिस वाले कोरोना जांच व कागजी कार्यवाही में उलझे रहे. बेटे का आरोप था कि किसी ने भी उसके पिता को हाथ तक लगा कर नही देखा.

दरअसल देहरादून से फतेहपुर के लिए सुभाष अपने पिता शिवपाल अपनी पत्नी और भाई राजोल के साथ लिंक एक्सप्रेस ट्रेन से सोमवार 10 मई की दोपहर को चले थे. सुभाष के बताए अनुसार पिता समेत सभी लोगों ने ट्रेन में खाना पीना खाया और ट्रेन के अंदर अपनी अपनी सीट पर जाकर लेट गए. जिसके बाद सुभाष ने अपने पिता शिवपाल को चंदौसी के करीब जगाया तो वह जागे नहीं. क्योंकि तब तक उनकी मृत्यु हो चुकी थी. ट्रेन में हुई शिवलाल की मौत की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को दी गई. म्रतक के बेटे सुभाष ने कहा कि लिंक एक्सप्रेस ट्रेन जब अलीगढ़ रेलवे स्टेशन पर पहुंची तो उस वक्त रात के करीब 10:00 बजे थे. स्टेशन पर पहुंचने के बाद म्रतक पिता शिवपाल के शव सहित परिवार के सभी लोगों को उस ट्रेन से अलीगढ़ रेलवे स्टेशन पर ही उतार लिया गया.

सुभाष का कहना है कि उसके पिता को सांस की बीमारी थी और अपने पिता के शव के लिए स्टेशन पर मौजूद अधिकारियों से एंबुलेंस मंगवाने को घंटों गुहार लगाता रहा, लेकिन देर रात उसके पिता की लाश कई घंटों तक रेलवे स्टेशन पर ही पड़ी रही. लेकिन किसी ने उसको एम्बुलेंस तक की व्यवस्था नहीं कराई गई. वहीं मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी ने हवाला दिया कि कोरोना काल चल रहा है, पहले टेस्ट कराया जाएगा उसके बाद ही अन्य व्यवस्थाएं होंगी. जबकि 10:00 बजे से रात 1:00 बजे तक भी किसी डॉक्टर ने सुभाष के पिता की कोई जांच नहीं की गई.