एएमयू में 20-25 दिनों में 2 दर्जन से ज्यादा प्रोफेसरान की मौत हो गई और मौत का तांडव AMU में अभी भी लगातार जारी है. जिस यूनिवर्सिटी के जेएन मेडिकल कॉलेज में किसी चीज़ की कमी ना हो और वहां पर मौत का इस तरह से हावी होना कहीं न कहीं मेडिकल लापरवाही का नतीजा है.

कोराना की दूसरी लहर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के कर्मचारियों के ऊपर कहर बनकर टूट रही है, जहां पिछले 22 दिन के अंतराल में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के करीब 26 प्रोफ़ेसर इस कोरोना काल में मौत के आगोश में समा चुके हैं. लेकिन इनमे से कुछ ऐसे प्रोफेसर भी थे, जिनकी कोरोना जांच रिपोर्ट निगेटिव आई थी. तो एएमयू के पूर्व छात्रसंघ अध्‍यक्ष फैजुल हसन ने प्रोफेसर एवं गैर शिक्षकों की जेएन मेडिकल कालेज में हुई मौत को लेकर CBI या सेवानिवृत्‍त जजों से जांच कराने की मांग की गई है.

बता दें कि AMU के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष फैजुल हसन ने कहा अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के अंदर पिछले 22 दिन के अंतराल में कोरोना की वजह से करीब 26 प्रोफ़ेसर की मौत हो गई है. इन प्रोफेसर की मौत होना अपने आप मे एक बहुत ही बडी क्षति है इसके बारे में UGC और CENTRAL GOVERNMENT को गहनता से इसकी इंक्वायरी करानी चाहिए और CBI जांच भी बैठानी चाहिए. इस तरह से AMU के बड़े-बड़े प्रोफेसर जिनका अपना एक रशुख था. जो AMU में बड़े एडमिनिस्ट्रेशिव पदों पर रह चुके थे. 22 दिन में इन 26 लोगों की कोरोना की वजह से मौत होना अपने आप में बहुत बड़ा मेडिकल नेगलिजेंस है. जिस पर तत्काल इंक्वायरी होनी चाहिए. इसमें जो भी दोषी पाया जाए उनके खिलाफ सेंट्रल गवर्मेंट को सख्त कार्यवाही करते हुए उनको सजा देनी चाहिए.

इन AMU प्रोफेसर की इस तरह मौत होना कोई मामूली चीज नही है. जहा AMU के JN मेडिकल कॉलेज में सभी चीज की facility मौजूद है. अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के अंदर ना तो रेमडेसिविर इंजेक्शन की कमी ना ऑक्सीजन और ना ही ईलाज की कमी है. लेकिन फिर भी अगर कोई मर रहा है तो इसका मतलब कही ना कही उनके ऊपर नेगलेजैसन बहुत ज्यादा बढ़ा है. जिसके ऊपर एक बड़ी इंक्वायरी रिटायर्ड जज या CBI के जरिए जांच कराते हुए दोषियों को सजा होनी चाहिए.