जहां देश में कोरोना संक्रमण लगातार बढ़ रहा है, जिसको लेकर शासन भी पूरी चोकसी बरत रहा है, चार अप्रैल तक कक्षा आठ तक के सभी स्कूल बंद कर दिए गए है, और नए आदेश के अनुसार यह समय ग्यारह अप्रैल तक बढ़ा दिया गया है, लेकिन देहात के कुछ स्कूलों को बच्चों के कोरोना संक्रमित होने का कोई डर नही है, तभी वह बेखौफ होकर शासनादेश की धज्जियां उड़ा रहे है.

बता दें कि शुक्रवार को मेरठ के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सतेन्द्र कुमार ने अपने बयान में साफ किया कि मेरठ में पहले से ही कक्षा एक से लेकर कक्षा आठ तक के बच्चों की चार अप्रैल तक छुट्टियां घोषित कर रखी है, जिनको अब ग्यारह अप्रैल तक बढ़ा दिया गया है. लेकिन इसी बयान के दौरान मेरठ के मवाना कस्बे के फलावदा गांव की एक तस्वीर सामने आई जिसमे गांव में स्थित आर्ष विद्या मंदिर के कक्षा एक से लेकर आठ तक के बच्चे बिना मास्के के स्कूल से आते नज़र आए.

बच्चों ने बताया कि उनके स्कूल में कोई छुट्टी नही है और वह लगातार स्कूल जा रहे है. यहां पर सवाल खड़ा होता है कि आखिर स्कूल प्रबंधक को किसने यह अधिकार दिया कि वह इस तरह से बच्चों के जीवन के साथ खिलवाड़ करे. बीएसए सतेन्द्र कुमार ने जिस आदेश का जिक्र अपने बयान मे किया है उस बयान के दौरान ही यह तस्वीरे सामने आई है. क्या यह मामला बीएसए साहब के संज्ञान में नही है, या फिर उन्होने अपनी आंखे बंद कर रखी है. अगर इस लापरवाही की वजह से मासूम बच्चे कोरोना जैसी घातक बीमारी की चपेट में आ जाते है तो इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा यह बड़ा सवाल है.

शासनादेश की धज्जियां उड़ता यह मामला योगी सरकार की कोरोना को लेकर जारी जंग की कलई खोल रहा है, देखना होगा कि अब दोषी स्कूल प्रबंधको के खिलाफ बीएसए कोई कार्रवाई करते है या नही.