आज से संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण शुरू हो रहा है. इस चरण में सरकार का मुख्य एजेंडा बजट की अनुदान मांगों पर चर्चा और वित्त विधेयक पर चर्चा और उन्हें पारित करवाना होता है. हालांकि ये सत्र ऐसे समय में शुरू हो रहा है जब बंगाल समेत 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव का ऐलान हो चुका है. ऐसे में यह तय माना जा सकता है कि इन चुनावों की गूंज संसद में भी सुनाई देगी. सभी पार्टियां संसद को भी चुनावी अभियान के एक मंच के तौर पर इस्तेमाल करना चाहेंगी.

वहीं कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों ने संकेत दिए हैं कि न सिर्फ बजट बल्कि कई अन्य मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी है. इनमें सबसे पहले किसान आंदोलन का मुद्दा है. आंदोलन के 100 दिन पूरे हो गए हैं और ऐसे में सरकार पर आंदोलन कर रहे किसानों से बातचीत कर आंदोलन खत्म करवाने की मांग की जाएगी.

इसके अलावा पेट्रोल-डीज़ल और एलपीजी के दाम आसमान छू रहे हैं और विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र विपक्ष की कोशिश सरकार को घेरने की होगी. महंगाई के सवाल पर विपक्षी पार्टियां लगातर सरकार पर हमले कर रही हैं. कोरोना के मामलों में एक बार फिर तेज़ी देखी जा रही है और इस मसले पर भी विपक्ष की ओर से सवाल पूछे जाएंगे. वहीं डिजिटल मीडिया के लिए बनाए गए नए नियमों पर भी विपक्ष ने सरकार को घेरने के संकेत दिए हैं.

वहीं दूसरी तरफ जहां तक सरकारी कामकाज का सवाल है तो बजट सत्र के इस भाग में सरकार का सबसे बड़ा लक्ष्य बजट की अनुदान मांगों और वित्त विधेयक पर संसद की मुहर लगवाने का होगा. मंगलवार से लोकसभा में बजट की अनुदान मांगों पर चर्चा शुरू हो जाएगी. सबसे पहले रेलवे की अनुदान मांगों पर चर्चा शुरू की जाएगी. इनके अलावा कई प्रमुख बिलों पर सबकी नज़र रहेंगी