भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर हो रही 10वें दौर की कोर कमांडर्स की बैठक 16 घंटे तक चली. यह बैठक रात दो बजे खत्म हुई. दोनों देशों के बीच दूसरे चरण के डिसइंगेजमेंट पर 16 घंटे तक बातचीत हुई‌. दोनों देशों के कोर कमांडर्स ने पहले चरण के डिसइंगेजमेंट पर संतोष जताया. दूसरे चरण के लिए पूर्वी लद्दाख से सटी एलएसी के डेपसांग प्लेन, गोगरा और हॉट स्प्रिंग में दोनों देशों की सेनाओं के पीछे हटना पर बातचीत हुई. बातचीत का नतीजा क्या रहा है, इसपर अभी जानकारी नहीं दी गई है.

बता दें कि इस वार्ता के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल पीजीके मेनन ने किया. वह लेह स्थित 14वीं कोर के कमांडर हैं. दूसरी ओर चीन की तरफ से इस बैठक का नेतृत्व मेजर जनरल लिउ लिन ने किया. वह चीनी सेना के दक्षिणी शिनजियांग सैन्य जिले के कमांडर हैं.

गौरतलब है कि भारत और चीन के बीच सीमा पर गतिरोध पिछले 9 महीने से जारी है. दोनों देशों के बीच पिछले साल पांच मई को पैंगोंग झील क्षेत्र में हिंसक संघर्ष के बाद सैन्य गतिरोध शुरू हुआ था. फिर हर रोज बदलते घटनाक्रम में दोनों पक्षों ने भारी संख्या में सैनिकों और घातक अस्त्र-शस्त्रों की तैनाती कर दी थी. गतिरोध के लगभग पांच महीने बाद भारतीय सैनिकों ने कार्रवाई करते हुए पैंगोंग झील के दक्षिणी छोर क्षेत्र में मुखपारी, रेचिल ला और मगर हिल क्षेत्रों में सामरिक महत्व की कई पर्वत चोटियों पर तैनाती कर दी थी.

नौवें दौर की सैन्य वार्ता में भारत ने विशेषकर पैंगोंग झील के उत्तरी क्षेत्र में फिंगर 4 से फिंगर 8 तक के क्षेत्रों से चीनी सैनिकों की वापसी पर जोर दिया था. वहीं, चीन ने पैंगोंग झील के दक्षिणी छोर पर सामरिक महत्व की चोटियों से भारतीय सैनिकों की वापसी पर जोर दिया था. समझौते के बाद दोनों पक्षों ने पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी छोर क्षेत्रों से अपने-अपने सैनिकों को वापस बुला लिया है.