अलीगढ़ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आज अखिल भारतीय वैश्य एकता परिषद के राष्ट्रीय अधिवेशन को मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित किया. यह कार्यक्रम आगरा रोड स्थित कैलाश फार्म हाउस पर हुआ जिसमें लोकसभा अध्यक्ष के अलावा नगर विकास राज्यमंत्री महेश गुप्ता, गन्ना मंत्री सुरेश राणा, कपिल देव अग्रवाल तमाम राजनेता व वैश्य समाज के लोग मौजूद रहे.

वैश्य समाज सम्मेलन को संबोधित करते हुए ओम बिरला ने कहा कि मुझे आपके बीच में आने में देरी हुई लेकिन मैंने वादा किया था कि मैं आपके बीच में पहुंचगा. इस देश के अंदर वैश्य समाज का राष्ट्र निर्माण में बहुत व्यापक योगदान रहा है. चाहे आजादी की लड़ाई हो चाहे आजादी के बाद नए भारत के निर्माण की बात हो. आजादी की लड़ाई में भी वैश्य समाज का बहुत बड़ा योगदान दिया और उसके पहले राजाओं के भी राज में भी जब राजा युद्ध लड़ते थे अपने राज को बचाने के लिए उस समय राजाओं के पास भी धन की कमी हो जाती थी तो भामाशाह की तरह आप लोग सहयोग देते थे.

हमारे पूर्वजों ने हमेशा सेवा त्याग और समर्पण से काम किया और जिस समाज के संस्कार ऐसे होते हैं जो कुछ भी है वह राष्ट्रवाद के लिए है यह समर्पण का भाव हमारे पूर्वजों का है और उसी कारण आज भी यही संस्कार है. जो कुछ भी है वह हमारा समाज के लिए समर्पित है. इसीलिए इस समाज की व्यापकता सभी समाज में है. भारत के संस्कार वसुदेव कुटुंबकम के आधार पर हैं. यदि कोई समस्या होगी तो हम सामूहिक रूप से उसका मुकाबला करेंगे. मैं आपके साथ हमेशा खड़ा हूं सुख दुख में आपके साथ रहूंगा,

साथ ही उन्होंने कहा हम इस देश के अंदर तोड़ने का काम नहीं करेंगे. जब हमारे पूर्वजों ने यह जाति धर्म के आधार पर समाज को खड़ा किया उस समय एक विचार था कि सब समाज अपने अपने समाज को विकास की ओर आगे ले जाएगा. वहां पर जो कुछ भी उस समाज के अंदर कोई गरीब व्यक्ति है तो उसका कैसे आगे ले जा सकता है और सामाजिक एकता का परिभाषा ही होता है. हमारा किसी तरीके से जातियों से जातियों को लड़ाना या जातियों के आधार पर समाज का निर्माण होना नही है। संपूर्ण जातियों के निर्माण को आगे का काम करना है अगर जातियों के आधार पर हम एक नया संघर्ष खड़ा कर देंगे तो हमारे देश की एकता को तोड़ने का काम होगा.

वहीं मीडिया से बात करते हुए ओम बिरला ने कहा कि सभी अपने अपने समाज के सर्वागीण विकास के लिए काम करेंगे तो हमारा देश मजबूत होगा और सभी समाज आगे बढ़ेंगे और देश आगे बढ़ेगा। हमारे संस्कार ऐसे होने चाहिए कि हम संपूर्ण समाज को जोड़ने का काम करें.