दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों की बढ़ती संख्या को देखते हुए रातों-रात गाजीपुर बॉर्डर को किले में तब्दील कर दिया गया है. गाजीपुर बॉर्डर पर पिछले 2 महीने से ज्यादा समय से कृषि कानून के खिलाफ आंदोलन कर रहा है. 26 जनवरी को लाल किले पर हुई घटना के बाद लगातार किसान वापस जा रहे थे, तभी उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से गाजीपुर बॉर्डर को खाली करने का आदेश भी दिया गया था लेकिन किसान नेता राकेश टिकैत के मीडिया के सामने रो जाने की घटना के बाद से एक बार फिर गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों के जत्थे के जत्थे आना शुरू हो गया है. हालात ये है कि गाजीपुर बॉर्डर पर एक बार फिर किसानों की संख्या तादाद से ज्यादा हो गई है, और दूर-दूर तक एक बार फिर बड़ी संख्या में ट्रैक्टर ट्रॉली ही नजर आ रही हैं.

वहां किसानों के बढ़ते हुजूम को देखकर सरकार भी बातचीत करने के लिए तैयार है. शनिवार के दिन हुई सर्वदलीय बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भी सभी विपक्षी पार्टी के नेताओं से कहा कि ”किसान और सरकार के बीच बातचीत का रास्ता हमेशा खुला है. भले ही सरकार और किसान आम सहमति पर नहीं पहुंचे. लेकिन हम किसानों के सामने विकल्प रख रहे हैं. वो इस पर चर्चा करें. किसानों और सरकार के बीच बस एक कॉल की दूरी है.”

वहीं दूसरी तरफ गाजीपुर बॉर्डर पर बढ़ती संख्या और किसान दिल्ली की ओर कूच ना करें इसके लिए गाजीपुर बॉर्डर पर रातो-रात 12 लेयर की बैरिकेडिंग कर दी गई है. गाजीपुर बॉर्डर पर ये बैरिकेडिंग दिल्ली पुलिस की तरफ से की गई है. पुलिस को आशंका है कि 1 फरवरी को, जिस दिन संसद में बजट सत्र पेश होना है. ऐसे में किसान कहीं दिल्ली की तरफ कूच ना कर दें, इसी आशंका के चलते यह बैरिकेडिंग की गई है