AMU के शताब्दी समारोह के उपलक्ष्य में 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर विक्टोरिया गेट के सामने बने पार्क में 30 फुट जमीन में दफन किया जाएगा टाइम कैप्सूल. इस टाइम कैप्सूल मे अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के इतिहास को 1877 से लेकर 2020 तक का इतिहास समेटा गया है. गणतंत्र दिवस पर 11 बजे एएमयू के कुलपति इस काम को अंजाम देंगे. सभी तैयारिया एएमयू की तरफ से पूरी हो चुकी है.

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के इतिहास के मामलों की जानकारी रखने वाले डॉक्टर राहत अबरार ने कहा कि हम 26 जनवरी को सुबह 11 बजे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के इतिहास और उपलब्धियों की जानकारी के साथ विक्टोरिया गेट के सामने बने पार्क में एक टाइम कैप्सूल 30 फुट जमीन में दबाने जा रहे हैं. वाइस चांसलर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस आयोजन में हिस्सा लेंगे. उन्होंने कहा कि एएमयू की स्थापना को 100 साल पूरे हो रहे हैं। इसलिए यह निर्णय लिया गया है। हमने महत्वपूर्ण दस्तावेजों को संरक्षित कर लिया है. जिन्हें विक्टोरिया गेट के सामने जमीन में दबाया जाएगा.

टाइम कैप्सूल विक्टोरिया गेट के सामने पार्क में 30 फुट जमीन के अंदर दफनाया जाएगा. टाइम कैप्सूल अगले 500 वर्ष के लिए तैयार किया गया है. इसको नुकसान ना पहुंचे इसके निर्माण के लिये तत्वों का इस्तेमाल किया जो टाइम कैप्सूल की बाहरी परत का निर्माण एक खास स्टील से किया गया है, और बाहरी परत पर कोटिंग भी की गई. इस टाइम कैप्सूल को बनाते वक़्त ध्यान रखा गया 500 वर्ष बाद जब इसको खोला जाए, तब किसी तरह की समस्या न आए। कैप्सूल मे सन 1877 से लेकर 2020 तक के AMU के इतिहास को समेटा गया है.

बता दें कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का इतिहास मुहम्मद एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज एक दिसंबर 1920 को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय बना और उसी साल 17 दिसंबर को विश्वविद्यालय के रूप में इसका औपचारिक रूप से उद्घाटन किया गया था. मुहम्मद एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज की स्थापना 1875 में सर सैयद अहमद खान ने की थी. जो उन्होंने ऑक्सफोर्ड और कैम्ब्रिज में देखी थी. 1920 में इसका नाम बदलकर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय कर दिया गया और औपचारिक रूप से 17 दिसंबर को तत्कालीन वीसी मोहम्मद अली मोहम्मद खान, महमूदाबाद के राजा साहेब द्वारा एक विश्वविद्यालय के रूप में उद्घाटन किया गया था.