सरकारी रिकार्ड में मृत दर्ज भोला सिंह खुद को जिंदा साबित करने के लिए 15 वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं.  उन्हें जिंदा साबित करने के लिए भोला  का डीएनए जांच के लिए ब्लड सैंपल भी लिया गया. मीडिया में खबर आने के बाद प्रशासन ने भोला और उनके परिवार का DNA जांच का फैसला किया है.  

बता दें कि संपत्ति के लोभ में परिवार के लोगों ने राजस्व निरीक्षक और लेखपाल को अपने पक्ष में करके भोला को खतौनी में मृतक दिखा दिया.  जानकारी लगने पर खुद को जिंदा साबित करने के लिए भोला डीएम कार्यालय के सामने खुद के जिंदा होने का बैनर लेकर बैठ गया था. बुजुर्ग भोला सिंह की खबर मीडिया पर चलने के बाद जिला प्रशासन ने भोला सिंह को घर से लाकर  मंडलीय अस्पताल में उनके DNA जाँच के लिए खून का सैम्पल लिया . जिसे DNA जांच के लिए भेजा गया. दूसरे पक्ष का सैम्पल सोमवार को लिया जाएगा. इस दौरान सीएमओ और जिला प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद रहे. सीएमओ का कहना इस मामले में डीएम ने DNA जाँच का आदेश दिया है. जिस पर जांच के लिए सैम्पल लिया गया है.

आपको बता दें कि सदर तहसील के अमोई ग़ांव निवासी 56 वर्षीय भोला डीएम कार्यालय के सामने हाथों में खुद के जिंदा रहने का बैनर लेकर बैठे वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है. बुजुर्ग भोला सिंह का कहना है कि संपत्ति को दो भाइयों के नाम कर उन्हें जीवित रहते हुए राजस्व निरीक्षक और लेखपाल ने मृतक दर्ज कर लिया है.  उनके हिस्से की जमीन भाई राज नारायण के नाम कर दिया है.