पंचायती चुनाव को लेकर भ्रष्टाचार की इबारत लिखी जानी शुरू हो चुकी है. सम्भल में एक युवती ने एडीओ पंचायत पर 5000 रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप लगाया है, जिसके बाद एसडीएम ने पूरे मामले में जांच के आदेश दिए है.

जहां एक तरफ योगी सरकार लगातार भ्रष्टाचार पर नकेल कसने की बात करती है. वहीं यूपी के जनपद सम्भल में एक बार फिर से भ्रष्टाचार के मामले उजागर हो रहे है. सरकार कहती है बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ, पर बेटी को परिवार रजिस्टर में अपना नाम दाखिल करवाने के लिए प्रभारी एडीओ पंचायत को 5000 की रिश्वत देनी पड़ेगी, तभी जाकर उस बेटी का नाम परिवार रजिस्टर में दाखिल हो पाएगा.

दरअसल मामला पंवासा विकासखंड के ग्राम मोहम्मदपुर टांडा से जुड़ा हुआ है. जहां 20 वर्षीय युवती नेहा ने प्रभारी एडीओ पंचायत कपिल देव पर आरोप लगाया है, कि मैं अपना परिवार रजिस्टर में नाम दाखिल कराने के लिए पवांसा विकासखंड गई थी. तब वहां पर मौजूद प्रभारी एडीओ पंचायत कपिल देव मुझसे परिवार रजिस्टर में नाम दाखिल करने के एवज में 5000 की मांग करते हैं, मैं बेहद गरीब परिवार से हूं मेरी आर्थिक हालत बहुत ही खराब है. इसीलिए मैंने पैसे देने से मना कर दिया जिसके चलते मेरा नाम परिवार रजिस्टर में दाखिल नहीं किया गया.

फिलहाल इस मामले में पीड़ित युवती नेहा ने सम्भल के तहसील समाधान दिवस में आरोपी कपिल देव के खिलाफ कार्रवाई को लेकर एक शिकायत पत्र दिया है. जिस पर कार्रवाई की बात कहते हुए एसडीएम दीपेंद्र कुमार ने जांच के आदेश दिए हैं. वही बात की जाए आरोपी एडीओ पंचायत कपिल देव की तो लगातार एक महीने से भ्रष्टाचार के तमाम गंभीर आरोपों को लेकर चर्चा में बने हुए हैं, पर कुछ बड़े अधिकारियों व नेताओं की असीम कृपा के चलते कार्रवाई तो दूर की बात है, कोई कार्यवाही के बारे में सोच भी नहीं सकता. वजह है योगी सरकार के जो सपने हैं वह धरातल पर कुछ भ्रष्ट लोग सच नहीं होने दे रहे हैं. जिससे लगातार सरकार की छवि पर भी सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं. अगर समय रहते शासन प्रशासन ने इन आरोपों की गंभीरता से जांच नहीं की तो फिर इस तरह के गंभीर मामले लगातार सामने आते रहेंगे.