अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय पर नगर निगम का संपत्ति कर की रकम में करीब 15 करोड रुपए बकाया है. यह बकाया राशि पिछले करीब आठ – नौ वर्ष पुरानी है. एएमयू की तरफ से किसी भी तरह का भुगतान न करने के बाद कल नगर निगम की टीम ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अकाउंट को सीज कर दिया था. इसके बाद अब अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय प्रशासन का भी पक्ष सामने आया है.

जहां एएमयू के प्रवक्ता शाफे किदवई का कहना है कि देखिए नगर निगम ने जो कार्यवाही की है वह पूरा मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है, और अलीगढ़ में जो कोर्ट है उसमें भी विचाराधीन है. एएमयू का जहां तक भुगतान का सवाल है यह 2006 से पहले तक जब अलीगढ़ नगरपालिका थी, तब AMU के क्लासरूम, लाइब्रेरी इत्यादि है उस पर किसी तरह का टैक्स नहीं था, और टैक्स में छूट हमें मिलती थी. लेकिन यूनिवर्सिटी का जो रेजिडेंशियल एरिया है जहां पर टीचर या नॉन टीचर रहते हैं उस पर जो टैक्स था नगर निगम का वह हम अभी तक दे रहे हैं.

लेकिन जब नगर निगम ने यह कहा कि 2006 के बाद से आप की हर जगह पर टैक्स देना होगा. उसके बाद AMU ने उसके खिलाफ मुकदमा किया. हाई कोर्ट में मामला चल रहा है और अलीगढ़ में भी मामला चल रहा है. मगर अभी कोरोना काल चल रहा है. इस लिए अभी सुनवाई ठीक तरह से नहीं हो रही है. यूनिवर्सिटी इस पूरे मामले को देख रही है. और AMU का नगर निगम पर नौ करोड़ 32 लाख बाकी है. जिसका नगर निगम ने कोई भुगतान नहीं किया है.

बता दें कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्यालय पर नगर निगम के द्वारा भवन कर को लेकर कार्यवाही का चाबुक चलाकर एएमयू के खाते सीज करने की कार्यवाही की गई थी, जिसके बाद नगर निगम की टीम ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी परिसर स्थित एसबीआई की शाखा मे पहुंचकर सीज की प्रक्रिया को पूरा किया था, साथ ही नगर निगम के द्वारा एएमयू को नोटिश देते हुए राशि जमा नहीं करने पर एएमयू की चल आंचल संपत्ति भी जब्त करने की बात कही गई थी.

वहीं खुद को साफ सुथरा बताने वाला नगर निगम अब खुद की कार्यवाही में ही फसता नजर आ रहा है, यही कारण है अब एएमयू प्रशासन ने भी अपने पत्ते खोलकर नगर निगम को आड़े हाथो ले लिया है, तो वही एएमयू को बकायेदार बताने वाला नगर निगम खुद ही एएमयू का बकायेदार बताया जा रहा है, जिसको लेकर एएमयू के द्वारा अब यूजीसी को पत्र लिखने की बात कही जा रही है.

जैसे ही एएमयू को नगर निगम की कार्यवाही की सूचना मिली तो एएमयू के पीआरओ के द्वारा जानकारी देते हुए बताया गया कि बकायेदार का नोटिश देने वाला नगर निगम खुद ही एएमयू का 9 करोड़ रुपये का बकायेदार है. एएमयू की जगह में नगर निगम की ट्यूबल लगी हुई है, जिसका बिल एएमयू के खाते से जाता है साथ ही एएमयू की जगह को नगर निगम के द्वारा काफी वर्षों से उपयोग भी किया जा रहा है. जिसको लेकर एएमयू के द्वारा काफी बार नगर निगम को नोटिश दिए गए लेकिन नगर निगम ने एएमयू का कोई बकाया जमा नहीं किया.