जहां केंद्र सरकार द्वारा पारित कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हजारों किसान दिल्ली की सीमा पर सड़कों पर ठंड में डटे हुए हैं. वहीं पंजाब में कुछ प्रदर्शनकारी मोबाइल टावरों को निशाना बनाते हुए खुद को किसान आंदोलन के समर्थक बता रहे हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी कड़ी कार्रवाई करने से बच रहा है. किन्तु 1,600 से ज्यादा मोबाइल टावरों को नुकसान पहुंचाए जाने के मामले का संज्ञान लेते हुए पंजाब के राज्यपाल वी. पी. सिंह बदनोर ने बुधवार को राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानदेशक को समन कर जवाब मांगा है.

तो वहीं इसके अलावा एसोचैम ने पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए सुरक्षित माहौल उपलब्ध करवाने का अनुरोध किया है. साथ ही इस पूरे घटनाक्रम पर एसोचैम का कहना है कि पड़ोसी राज्यों से जुड़ने वाले मुख्य राजमार्गों के जाम होने के कारण रोजाना हजारों करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है.

वहीं आधिकारिक बयान के अनुसार, ‘पंजाब के राज्यपाल वी. पी. सिंह बदनोर ने किसानों के प्रदर्शन के दौरान हुई तोड़फोड़ पर, जिसमें पिछले कुछ दिनों में 1600 से ज्यादा मोबाइल टावर क्षतिग्रस्त किए गए हैं, गंभीरता से संज्ञान लिया है.

बता दें कि प्रदर्शनकारी किसानों ने मुकेश अंबानी की कंपनी जियो के टावरों को नुकसान पहुंचाते हुए कहा कि नए कृषि कानून से अरबपतियों को सबसे ज्यादा फायदा होगा. बिजली की आपूर्ति में कटौती करते हुए दूरसंचार टावरों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है. एक मामले में, मोबाइल टावर की साइट से जनरेटर को हटा दिया गया और कथित रूप से एक स्थानीय गुरुद्वारे को दान कर दिया गया. वहीं जियो के कर्मचारियों को धमकी देने का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

वहीं बीजेपी के शीर्ष नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को राज्यपाल से मिला और ज्ञापन सौंपते हुए जानकारी दी कि बीते कुछ दिनों में राज्य में हिंसा और उपद्रव को लेकर चिंताजनक स्थिति बनी हुई है. साथ ही यह भी कहा कि कृषि कानून के विरोध प्रदर्शन के बीच राज्य की सरकारी एजेंसियां लॉ एंड ऑर्डर संभालने में नाकाम रही हैं. जिसके बाद राज्यपाल ने इस संबंध में मुख्य सचिव और डीजीपी को पूरे मामले पर रिपोर्ट करने के लिए राजभवन तलब करने का निर्णय लिया है.

राज्यपाल वीपी बदनौर ने कहा कि राज्य सरकार को ऐसे उपद्रवी और हिंसात्मक परिस्थितियों को संभालने के लिए तुरंत एक्शन लेना चाहिए और राज्य में कम्युनिकेशन के ढांचे को तबाह होने से बचाना चाहिए. मौजूदा वक्त में एजुकेशन ऑनलाइन चल रही है और मोबाइल टावरों को नुकसान होने से ना केवल छात्रों का नुकसान होगा, बल्कि समाज और अर्थव्यवस्था को भी इसकी कीमत चुकानी पड़ेगा.