उत्तर प्रदेश के जनपद शाहजहाँपुर में गरीब मजदूर और रिक्शा चलाने वाले परिवार के बच्चों का भविष्य संवारने के लिए 2 घंटे की फ्री पाठशाला शुरू की गई है. जिनके पास 1 वक्त का खाना खाने के लिए पैसे नही होता है, उनके बच्चों के लिए बाकायदा इंग्लिश मीडियम जैसे महंगे स्कूल के क्लास में पाठशाला लगाई जाती है. करीब 220 परिवार ऐसे हैं, जिनके बच्चे 2 घंटे की इंग्लिश में पढ़ाई करके इंग्लिश में बात करना सीख गए हैंय. ऐसे ही गरीब बच्चे जब अपने माता-पिता की मेनहत को ब्यान करते है तो वाकई आपका भी दिल पसीज जाएगा. इन बच्चों को पढ़ाने के लिए आने वाली टीचरों का कहना है कि सबकुछ पैसा नहीं होता है, वह चाहती हैं कि पढाई से ही गरीब बच्चों का भविष्य संवर जाये ऐसा करने से दिल को सुकून मिलता है.

दरसअल शाहजहाँपुर में माधव राव सिंधिया पब्लिक स्कूल की दो ब्रांच है, जिला अस्पताल के पीछे बड़ी ब्रांच है, जहां पर दिन में स्कूल खत्म होने के बाद शाम के 4 बजे से गरीबों के बच्चों के लिए 2 घंटे की पाठशाला लगाई जाती है. जिस तरह से फीस देकर पढ़ने वाले बच्चे आते हैं, बिल्कुल वैसे ही गरीब, मजदूर, रिक्शा चलाने वाले परिवार के बच्चों को स्कूल के अंदर क्लास में बैठाकर फ्री में शिक्षा दी जा रही है. गरीब बच्चों की लगने वाली पाठशाला की देखरेख करने वाली टीचर नुजहत अंजुम ने बताया कि सिर्फ 7 बच्चों से शुरूआत की थी, लेकिन धीरे-धीरे निशुल्क पढ़ाई की बात इलाके में पहुची तो, अब 220 बच्चे निशुल्क शिक्षा ले रहे हैं.

उनका कहना है कि सरकार ने कोरोना काल के दौरान आनलाइन पढ़ाई का फरमान सुनाया था, लेकिन ज्यादातर ऐसे परिवार भी हैं, जिनके घरों में तीन वक्त का खाना बमुश्किल बन पाता है. उनके पास अच्छे महंगे मोबाइल नही हैं. आखिर वह शिक्षा कैसे प्राप्त करें, इसलिए ऐसे बच्चों को, जिनके माता-पिता महंगे इंग्लिश मीडियम में एडमीशन कराने में असमर्थ हैं क्योंकि उनके पास पैसा नही होता है, इसी बात का ख्याल रखते हुए ही हम उनके बच्चों को क्लास में बैठाकर फ्री शिक्षा दे रहे हैं. सबकुछ पैसा नही होता है, मेरे पास एजुकेशन है, हम एजुकेशन को ट्रांसफर कर बच्चों का अच्छा भविष्य बनाने की पहल कर रहे हैं.

वहीं स्कूल के डायरेक्टर मून जौहरी ने बताया कि उनकी 2 ब्रांच पर 220  गरीब बच्चे शिक्षा हासिल कर रहे हैं. ये ऐसे बच्चे हैं जिनके माता-पिता पैसे न होने के कारण महंगे इंग्लिश मीडियम स्कूल में आपने बच्चों को नहीं भेज पाते हैं. इसलिए अब वह इसी तरह से जनपद में अलग अलग जगहों पर सेंटर खोलेंगे, ताकि किसी गरीब परिवार का बच्चा अनपढ़ न रह जाए. साथ ही वह चाहते हैं कि आने वाले दौर में हर बच्चा इंग्लिश में बात करें. खास बात ये है कि बच्चों को पढ़ाने बाले टीचर 2 घंटे के लिए निशुल्क गरीब परिवार के बच्चों को पढ़ाने के लिए आते हैं. 2 घंटे का वक्त देने का वह कोई सैलरी भी नही लेते हैं.