बदलते परिवेश तथा वर्तमान हालातों के मद्देनजर यह कहना कदापि गलत नहीं होगा कि लंबे समय तक घर की चारदीवारी में जकड़ी रहने के बाद आज के दौर की महिलाओं में स्वावलंबन की चाह विस्तृत होने लगी है. इसका जीता जागता स्वरूप जम्मू-कश्मीर के कठुआ की रहने वाली पूजा देवी हैं, जो राज्य की पहली महिला बस ड्राइवर बन गईं हैं. वो जम्मू-कठुआ रोड पर यात्री बस चलाती हैं. बता दें जम्मू -कश्मीर में उनसे पहले किसी महिला ने आज तक यात्री बस नहीं चलाई थी. मूल रूप से एक ड्राइविंग ट्रेनर पूजा देवी ने पेशेवर ड्राइवर बनने के अपने जुनून के कारण इस पेशे को अपनाया. महिला ड्राइवर पूजा को हर पड़ाव पर कठुआ से जम्मू वापसी और जाने के क्रम में लोगों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही हैं और लोग उनके हौसले की तारीफ कर रहे हैं.

जम्मू से कठुआ और कठुआ से जम्मू के बीच चलने वाली एक बस का स्टीयरिंग बुधवार सुबह पूजा देवी के हाथ में था. जहां देखने वाले हैरान थे, तो वहीं पूजा के चेहरे पर बस चलाने की खुशी झलक रही थी. परिवार और आसपास के जो लोग पहले उनकी ड्राइविंग का विरोध कर रहे थे, आज पूजा उन्हें गौरवान्वित कर रही हैं. बताया जा रहा है कि पूजा ने अन्य महिलाओं को भी ड्राइविंग सिखाने की ठान ली है. सोशल मीडिया पर लोग पूजा देवी की इस उपलब्धि से काफी खुश हैं. लोग इसे ‘वुमन पावर’ की जीत बता रहे हैं.

वहीं कठुआ जिले के सुदूर संधार-बसोहली गांव में पली-बढ़ी 30 साल की पूजा ने कहा कि उसे ड्राइविंग का शौक था और वो तब से कार चला रही थीं ,जब एक टीनएजर थीं. उसके मन में भारी वाहन चलाने की इच्छा शुरुआत से ही थी और वो सपना अब जाकर पूरा हुआ. पूजा ने कहा, ”मेरे परिवार ने शुरू में मेरा साथ नहीं दिया. लेकिन, कोई अन्य नौकरी करने के लिए मैं ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं थी. यह पेशा मुझे सूट करता है. मैं कमर्शियल वाहन चलाना सिखाती थी, मैं टैक्सी भी चला चुकी हूं. मैं जम्मू में ट्रक भी चला चुकी हूं. मेरा सपना आखिरकार सच हो गया है, पूजा अपने छोटे बेटे को बस में ही ड्राइवर सीट के पीछे बैठाकर बस चला रही थीं. उनकी बेटी दसवीं कक्षा की छात्रा है.

बस ड्राइवर बनने के फैसले पर उन्हें अपने ही परिवार में विरोध भी झेलना पड़ा. पूजा ने कहा, परिवार के सदस्य और ससुराल वाले पेशे के खिलाफ थे, पूजा देवी ने बताया कि उसने परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों के विरोध के बावजूद पेशेवर ड्राइवर बनने के अपने सपने को आगे बढ़ाने का फैसला किया. पूजा ने इस प्रोफेशनल ड्राइवर बनने के फैसले को लेकर कहा कि आज महिलाएं फाइटर जेट्स उड़ा रही हैं. मैं टैबू को तोड़ना चाहती थी कि केवल पुरुष ही नहीं बल्कि महिला भी यात्री बस चला सकती है. मैं उन सभी महिलाओं को संदेश देना चाहती थी, जो चुनौतीपूर्ण नौकरियों में अपना हाथ आजमाना चाहती हैं और परिवार उन्हें अपने सपनों को पूरा नहीं करने देते हैं.

पूजा देवी ने बताया कि उन्हें सबसे ज्यादा व्यस्त रहने वाला जम्मू-कठुआ-पठानकोट रूट मिला है. इस हाइवे पर किसी अच्छे ड्राइवर के लिए भी बस चलाना मुश्किल होता है क्योंकि ट्रैफिक बहुत ज्यादा होता है लेकिन, मैंने हमेशा इसका सपना देखा. पहली ड्राइव ने मुझे बहुत आत्मविश्वास दिया.

पूजा देवी ने कहा कि उनका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था और यह उन कारणों में से एक था जिसकी वजह से उन्हें कमाने के लिए घर से बाहर आना पड़ा. उन्होंने बताया, ”मुझे जम्मू में एक प्रतिष्ठित ड्राइविंग संस्थान से प्रशिक्षक के रूप में प्रति माह 10000 रुपये मिल रहे थे. जब मुझे भारी वाहन ड्राइविंग लाइसेंस मिला, तो मैंने संघ से संपर्क किया और उन्होंने जम्मू-कठुआ सड़क पर चलने वाली एक यात्री बस को सौंपकर मेरे कौशल पर भरोसा किया.

वहीं पूजा देवी को बस चलाने की अनुमति देने वाले जम्मू-कठुआ बस यूनियन के अध्यक्ष सरदार कुलदीप सिंह ने कहा, ”यह एक अच्छा कदम है और महिलाओं को आगे आना चाहिए. मैंने कल उसे बस दी, जब उसने मुझसे संपर्क किया. लोग हर पड़ाव पर उसका स्वागत कर रहे हैं.