हमीरपुर हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना से बचने के लिए आखिरकार प्रशासन ने मंगलवार को सपा की डॉ.वंदना यादव को जिला पंचायत अध्यक्ष का कार्यभार सौंप दिया. इसके साथ ही जिला पंचायत परिसर सपाइयों की नारेबाजी से गूंज उठा. जिला पंचायत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी जिला पंचायत अध्यक्ष को अविश्वास प्रस्ताव के सहारे कुर्सी से हटाने वालों को कार्यकाल के अंतिम चरण में इस प्रकार से कुर्सी गंवानी पड़ी हो.

यहां अगर देखा जाए तो कुल मिलाकर हाईकोर्ट के सहारे सपा के हाथ बड़ी कामयाबी लगी है. जिससे सपा खेमे में हर्ष की लहर है. सपाई आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में इससे पार्टी को फायदा होते देख रहे हैं.

बता दें कि 2 अप्रैल 2018 में सपा की डॉ.वंदना यादव के खिलाफ भाजपा की जयंती राजपूत अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई थी. जिसके बाद वंदना यादव को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी थी. वंदना के पति को आपरेटिव बैंक के पूर्व चेयरमैन पुष्पेंद्र सिंह यादव सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के करीबी रिश्तेदार हैं. पद गंवाने के बाद वंदना ने अविश्वास प्रस्ताव की पूरी प्रक्रिया को अवैध ठहराते हुए हाईकोर्ट में रिट दायर की थी. जिसके बाद अब 26 नवंबर को हाईकोर्ट की डबल बैंच ने इस पूरी प्रक्रिया को अवैध मानते हुए जयंती राजपूत के चुनाव को खारिज कर दिया, और वंदना यादव के कब्जे में एक बार फिर ज़िला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी आ गई है.