उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद के रसड़ा में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के 100 वर्षों में पहली बार बलिया के एक छात्रा नेहा सिंह का “गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड ” में नाम दर्ज हुआ है. बता दें कि नेहा सिंह ने श्रीमद भगवदगीता पर आधारित मोक्ष का वृक्ष पेंटिंग तैयार कर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराकर बलिया जनपद का भी नाम रोशान किया है.

वहीं इसके बाद बलिया के DM श्री हरि प्रताप शाही ने नेहा सिंह के घर रसड़ा तहसील क्षेत्र के डेहरी गांव में खुद आकर उन्हें बधाई दिया. साथ ही सर्टिफिकेट का विमोचन भी किया. वहीं उनके साथ रसड़ा SDM मोती लाल यादव भी आये, और आशीर्वाद प्रदान किया, बलिया की बेटी नेहा सिंह द्वारा खनिज रंगों से ‘भगवद्गीता’ पर आधारित “मोक्ष का पेड़” नामक चित्र बनाकर “गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड” में अपना नाम दर्ज करके अपने शहर बलिया के साथ साथ राज्य एवं देश का नाम भी रोशन किया है, वही बलिया की पहली अकेली “गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड धारी” बनी हैं नेहा सिंह.

आपको बता दें कि नेहा पिछले साल से ही इस की तैयारी में थी, लॉक डाउन में अप्रैल महीने से घर बैठ कर खनिज रंगों से बनाया सबसे बड़ा पेंटिंग जिसका साइज 62.72 स्कॉयर मीटर यानी की 675.36 स्कॉयर फ़ीट है. पेंटिंग जुलाई महीने में ही गिनीज़ के नियमों के अनुसार तैयार करके ऑनलाइन से सारा डाक्यूमेंट्स जमा कर चुकी थी मगर कोविड के चलते गिनीज़ से जवाब आने में चार महीने का समय लग गया.

पहले यह रिकॉर्ड भारत के ही आंध्रप्रदेश के विजयवाड़ा की रहनेवाली श्रेया तातिनेनी के नाम था. जिन्होंने 29 सितंबर 2019 को 54.67 स्कॉयर मीटर यानी 588.56 स्कॉयर फ़ीट में खनिज रंगों से पेंटिंग बनाई थी, उसी समय से इसी रिकॉर्ड को तोड़ने के लिए एप्लीकेशन डाला हुआ था मगर गिनीज़ रिकॉर्ड से अनुमति मिलते एवं तैयारियां करते करते साल भर का समय लगा.

बता दें कि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के वैदिक विज्ञान केंद्र के पहले सत्र की छात्रा नेहा सिंह को वैदिक साहित्य में अधिक रुचि होने के कारण ललित कला में स्नातकोत्तर है. आजकल के भागदौड़ एवं मोह-माया से दूर नेहा वैदिक विज्ञान, उपनिषद, भगवद्गीता, भारतीय संस्कृति आदि विषयों में निरंतर शोध एवं अध्ययन में लगी रहती है. वहींआम जन को देखने के लिए नेहा सिंह ने पेंटिंग को अपने गांव रसड़ा के बाहर लगाया है.