महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे ने किसान आंदोलन पर रविवार को भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा. उद्धव ठाकरे ने कहा कि जो लोग अन्नदाता को आतंकी कह रहे हैं वे इंसान कहलाने के लायक नहीं हैं. सीएम ठाकरे ने कहा कि देवेंद्र फडणवीस कहते हैं कि महाराष्ट्र में अघोषित आपातकाल है. साथ ही उद्धव ठाकरे ने बीजेपी से पूछा कि तो दिल्ली में क्या हो रहा है? आप अन्नदाता को ‘आतंकवादी’ कह रहे हैं. सीएम उद्धव ठाकरे कहा कि कृषि कानूनों के खिलाफ किसान दिन-रात इस ठंड के मौसम में खुले आसमान के नीचे सो रहे हैं और बीजेपी उन्हें एंटी नेशनल, पाकिस्तानी और खालिस्तानी बता रही है.

बता दें कि ठाकरे ने कहा कि ‘किसान ऐसे सर्द मौसम में दिन-रात सड़क पर बिता रहे हैं. बीजेपी के नेताओं को मिलकर यह तय करना चाहिए कि वे कौन से किसान हैं, जो वामपंथी हैं, पाकिस्तानी हैं या चीन से आए हैं? आपको एक बात समझने की ज़रूरत है कि आप हमारे किसानों के साथ अन्याय कर रहे हैं और आप उन्हें राष्ट्रविरोधी कहते हैं? यह हमारी संस्कृति नहीं है. हमारे किसानों से बात करने के बजाय बीजेपी उन्हें पाकिस्तानी, राष्ट्र विरोधी कह रही है. ये वही लोग (बीजेपी) हैं जो पाकिस्तान से चीनी और प्याज ला रहे हैं, तो अब वही पाकिस्तान से किसान भी ला रहे हैं?’

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जो कोई भी मजदूरों और किसानों के लिए बोलता है, क्या वे राष्ट्र विरोधी हैं? अगर बीजेपी नेता किसानों के बिल को इतनी अच्छी तरह से जानते हैं तो वे किसानों के साथ बैठकर उन्हें क्यों नहीं समझा रहे हैं? वे सिर्फ कैमरे पर क्यों बोल रहे हैं और प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं.

आपको बता दें कि इससे पहले महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने उद्धव ठाकरे सरकार पर सभी मोर्चों पर विफल रहने और इस विषय पर बहस से बचने का आरोप लगाया. राज्य विधानसभा का दो दिवसीय शीतकालीन सत्र शुरू होने से एक दिन पहले संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए फडणवीस ने दावा किया कि यह दरअसल एक दिवसीय सत्र ही है जिसमें अनुपूरक मांगों को पारित करने के लिए केवल छह घंटे का वक्त मिलेगा.

वहीं महाराष्ट्र में विपक्ष ने सत्र से पहले चाय पार्टी का बहिष्कार किया फडणवीस ने कहा कि बीजेपी ने सत्तारूढ़ दल की नाकामी के विरोध में सत्र से एक दिन पहले होने वाली चाय पार्टी का बहिष्कार किया है . उन्होंने कहा कि सरकार ने शीतकालीन सत्र दो हफ्ते का आयोजित करने की विपक्ष की मांग को खारिज कर दिया, और इस बात से भी इनकार कर दिया कि अगले वर्ष बजट सत्र नागपुर में होगा.