दिल्ली के शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून CAA विरोध में प्रदर्शन के नाम पर सड़क रोके जाने को सुप्रीम कोर्ट ने गलत बताया है.कोर्ट ने कहा है कि सार्वजनिक जगहों पर अनिश्चितकाल तक प्रदर्शन नहीं हो सकता है . साथ ही कोर्ट ने ये भी कहा है कि इस मामले में प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए थी, जो उसने नहीं की. कोर्ट ने यह भी उम्मीद जताई है कि भविष्य में ऐसी स्थिति नहीं बनेगी.

वहीं प्रदर्शन के करीब 7 महीने बाद दिए फैसले में कोर्ट ने कहा है कि नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन और विरोध में लोगों के विचार हैं. आज के दौर में सोशल मीडिया पर होने वाली चर्चा से भी भावनाएं और तेज़ होती हैं. विरोध करने वालों ने प्रदर्शन के ज़रिए अपनी बात रखी. लेकिन एक अहम सड़क को लंबे समय तक रोक देना भी सही नहीं था.

बता दें कि दिसंबर 2019 में केंद्र सरकार ने संसद से नागरिकता संशोधन कानून पास किया था. जिसके तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले धार्मिक अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का प्रावधान किया गया. इस कानून को धर्म के आधार पर बांटने वाला बताकर दिल्ली के शाहीन बाग से लेकर देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन किए गए. शाहीन बाग में दिसंबर से मार्च तक कोरोना लॉकडाउन लगने तक सड़कों पर प्रदर्शन चल रहा था.

वहीं इसी मामले पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सार्वजनिक स्थानों और सड़कों पर अनिश्चितकाल तक कब्जा नहीं किया जा सकता है. केवल तय स्थानों पर ही प्रदर्शन होना चाहिए. कोर्ट ने ये भी कहा कि आवागमन का अधिकार अनिश्चितकाल तक रोका नहीं जा सकता. साथ ही कोर्ट ने ये भी कहा कि सार्वजनिक बैठकों पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता है लेकिन उन्हें निर्धारित क्षेत्रों में होना चाहिए. संविधान विरोध करने का अधिकार देता है लेकिन इसे समान कर्तव्यों के साथ जोड़ा जाना चाहिए.