हाथरस मामले पर चारों तरफ से घिरी योगी सरकार ने आखिर कर मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी है. कई दिनों से सियासी हमला छेल रही सूबे की सरकार ने शाम होते होते मामले को सीबीआई को सौंपने का ऐलान कर दिया. जिस तरीके से देश भर में इस मामले को लेकर गुस्सा था और विरोधी सवाल उठा रहे थे उसको देखते हुए इस फैसले को सरकार का मास्टर स्ट्रोक बताया जा रहा है. योगी सरकार की तरफ से ये फैसला सटीक वक्त पर लिया गया फैसला था क्योंकि एसआईटी की रिपोर्ट के बाद एसपी से लेकर डीएसपी और सीओ को लापरवाही में सस्पेंड किया जा चुका था. ऐसे में पुलिस से मामले की जांच करवाने पर सियासत और सवालों का सिलसिला नहीं थमने बाला था. ऐसे में योगी सरकार का यह फैसला बड़ा ही सूझबूझ का फैसल माना जा रहा है.

बता दें कि कल यूपी के डीजीपी और गृह सचिव अवनीश अवस्थी ने पीड़ित परिवार के साथ मुलाकात की थी और उनसे उनकी शिकायतें और मांगें सुनीं. परिवार से मुलाकात के बाद अधिकारियों ने सीएम योगी आदित्यनाथ के सामने पीड़ित परिवार की सारी मांगों को रखा, जिसके बाद ही यूपी के सीएम ने देर रात सीबीआई जांच के आदेश दे दिए. इससे पहले यूपी सरकार ने इस मामले में एसआईटी जांच के आदेश दिए थे. हालांकि परिवार का कहना था कि उन्हें पुलिस पर यकीन नहीं.

गौरतलब है कि यूपी सरकार का ये आदेश लगभग उसी वक्त आया जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पीड़ित परिवार से मुलाकात कर रहे थे. राहुल और प्रियंका ने पीड़ित परिवार से करीब एक घंटे तक बातचीत की और उनसे उनका दर्द बांटा. साथ ही मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने कहा, “हम इस दुख में पीड़ित परिवार के साथ हैं. सरकार इन्हें डरा रही है, धमका रही है. इन्हें सुरक्षा देना सरकार की जिम्मेदारी है. लेकिन इन्हें सुरक्षा देने का फैसल यूपी सरकार नहीं कर पा रही है. इन्हें धमका कर कागजों पर दस्तखत करवाए गए हैं.”