उत्तर प्रदेश के हाथरस कांड में राज्य सरकार ने कड़ी कार्रवाई की है. इस मामले में अब आरोपियों के साथ-साथ पीड़ित परिवार का भी पॉलीग्राफ और नारको टेस्ट कराया जाएगा. सरकार ने इस बात का फरमान एसआईटी की पहली रिपोर्ट मिलने के बाद किया है. वहीं हाथरस के पुलिस अधीक्षक, एक डीएसपी और संबंधित थाना प्रभारी को भी सस्पेंड कर दिया गया है.

देर शाम सरकार की तरफ से जारी किए एक प्रेस नोट के जरिए इस बात की जानकारी दी गई. ऐसा पहली बार होगा कि किसी मामले की जांच करने वाली पुलिस टीम का भी पॉलीग्राफ और नारको टेस्ट कराया जाएगा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस मामले में अधिकारियों की कार्रवाई को लेकर खासे नाराज थे. इसी वजह से एसआईटी की पहली रिपोर्ट मिलते ही सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है.

इस मामले में एसआईटी जांच कर रही है. एसआईटी के अलावा शीर्ष स्तर पर यह आदेश हुआ है कि जांच को साइंटिफिक तौर पर भी कराया जाए. यानी जो चश्मदीद हैं, उनके बयानों के अलावा नारको या पॉलीग्राफ टेस्ट कराकर बयानों की सच्चाई परखा जाना जरूरी है. एसआईटी ने यह रिकमेंडेशन सरकार से की है. इसी के आधार पर घटना से जुड़े सभी लोगों का नारको टेस्ट व पॉलीग्राफी टेस्ट कराया जाएगा.

बता दें कि उत्तर प्रदेश के जनपद हाथरस के थाना चंदपा इलाके के गांव में 14 सितंबर को एक 19 वर्षीय दलित किशोरी के साथ गांव के रहने वाले चार दबंग युवकों ने गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया था, जिसके बाद पुलिस ने गैंग रेप करने वाले चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. युवती गंभीर रूप से घायल हो गई. आनन-फानन में उसे अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया गया. हालत बिगड़ता देख उसे सफदरजंग रेफर किया गया, जहां उसकी मौत हो गई .