बिहार में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है. कोरोना संकट के बीच देश में होने वाले ये पहले बड़े चुनाव हैं. शुक्रवार को चुनाव आयोग की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन तारीखों का ऐलान किया गया. इस बार बिहार में तीन चरणों में मतदान होंगे और 10 नवंबर को नतीजे घोषित किए जाएंगे.वहीं इस बार चुनाव में मतदान के लिए एक घंटे का समय बढ़ाया है. सुबह 7 से शाम छह बजे तक मतदान होगा. पहले शाम 5 बजे तक मतदान होता था. हालांकि, यह सुविधा नक्सल प्रभावित इलाकों में नहीं दी गई है.

पहले चरण के लिए 28 अक्टूबर को 16 जिलों के 71 विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव होंगे. मतदान में करीब 31,000 पोलिंग बूथ पर वोट डाले जाएंगे. 1 अक्टूबर को नॉमिनेशन जारी किया जाएगा. नामांकन भरने की आखिरी तारीख 8 अक्टूबर है. 12 अक्टूबर तक उम्मीदवार अपना नामांकन वापस ले सकते हैं.

वहीं दूसरे चरण में कुल 17 जिलों के 94 विधानसभा क्षेत्रों में 42,000 पोलिंग बूथ पर वोट डाले जाएंगे. दूसरे चरण के लिए वोटिंग तीन नवंबर होगी. अधिसूचना 9 अक्टूबर को जारी की जाएगी. 16 अक्टूबर तक उम्मीदवार नामांकन दाखिल कर सकते हैं और 19 अक्टूबर तक अपनी उम्मीदवारी वापस लेने का ऑप्शन है.

तो तीसरे चरण में 7 नवंबर को साढ़े 33 हजार पोलिंग बूथ पर वोट डाले जाएंगे. 15 जिलों के 78 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान होंगे. उम्मीदवार 13 अक्टूबर से 20 अक्टूबर के बीच नामांकन दाखिल कर सकते हैं. उम्मीदवारी वापस लेने की आखिरी तारीख 23 अक्टूबर है.

बता दें कि पहले चरण में इन जिलों में मतदान होगा, बक्सर, भोजपुर, अरवल, जहानाबाद, औरंगाबाद, गया, कैमूर, रोहतास, नवादा, शेखपुरा, मुंगेर, बांका, जमुई और लखीसराय में पहले फेज में वोट डाले जाएंगे. वहीं दूसरे फेज में गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, सीवान, शिवहर, मुजफ्फरपुर, सारण, वैशाली, नालंदा, पटना, बेगूसराय, समस्तीपुर, भागलपुर और खगड़िया में वोटिंग होगी.और पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी, दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, मधेपुरा, सहरसा, पूर्णियां, अररिया, किशनगंज और कटिहार में तीसरे फेज में चुनाव होंगे.

तो वहीं बिहार विधानसभा चुनाव के तिथियों के घोषणा के साथ ही राज्य में चुनाव आचार संहिता लागू हो गया है. देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव आयोजित कराने के लिए भारतीय चुनाव आयोग कुछ नियम बनाती है, इसे ही आचार संहिता कहा जाता है. लोकसभा/विधानसभा चुनाव के दौरान इसे लागू किया जाता है. वहीं इसके अनुपालन की जिम्मेदारी पूरी तरह से सरकार, नेता और पॉलिटिकल पार्टियों की होती है. जबकि इसके उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है.

बिहार में विधानसभा की कुल 243 सीट हैं. इन सीटों में 38 सीटें अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व हैं. दो सीटें अनुसूचित जनजाति वर्गों के लिए आरक्षित हैं. बिहार में सबसे बड़ा चुनावी फैक्टर जाति को ही करार दिया जाता है, क्योंकि यहां बड़े पैमाने पर वोट देने का पैटर्न अपनी अपनी करीबी जातियों के आधार पर तय होता है.