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अलीगढ़ डॉ.कफील की रिहाई पर एएमयू में मना जश्न,जमकर बाटी गई मिठाई

गोरखपुर के डॉक्टर कफील खान को इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश के बाद रिहा कर दिया गया है। कोर्ट ने कफील खान पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून एनएसए लगाए जाने की निंदा की थी। इस फैसले के बाद अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय परिसर में जमकर जश्न मनाया गया। इस दौरान एएमयू के छात्र नेताओं ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया है।

साल 2019 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर भड़काऊ संबोधन करने के आरोपी और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की कार्रवाई का सामना कर रहे डॉक्टर कफील की हाईकोर्ट से रिहाई के आदेश पर एएमयू विश्वविद्यालय परिसर में जमकर जश्न मनाया गया। हाईकोर्ट के फैसले का एएमयू के छात्र नेताओं ने स्वागत किया है। 

वहीं अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्रों ने हाईकोर्ट के फैसले को इंसाफ की जीत बताया है। और कहा कि यह प्रदेश सरकार के अहंकारी रवैये और दमनकारी नीति की हार है। तानाशाही पर लोकतंत्र की जीत है। देश के आपातकालीन माहौल में इस फैसले से लोगों का विश्वास संवैधानिक संस्थाओं में और बढ़ेगा। कहा कि हम पहले भी मुख्यमंत्री से डॉ. कफील की रिहाई की मांग कर रहे थे और कह रहे थे कि महामारी के समय उनकी सेवाओं की आवश्यकता है। 

तो वहीं एएमयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष फैजुल हसन ने कहा कि डॉ. कफील की आजादी न्याय की जीत है। सत्य परेशान हो सकता है। लेकिन पराजित नहीं हो सकता। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि लोकतंत्र का जिंदा रहना बहुत जरूरी है। हाईकोर्ट के फैसले से प्रदेश सरकार की तानाशाही पर भी प्रहार हुआ है। अब एक नए हौसले के साथ सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ फिर से लड़ाई लड़ी जाएगी। जिन लोगों को नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने पर जेल में डाल दिया गया था उनके लिए एक संघर्ष का नया अध्याय शुरू होगा। 

साथ ही इंडिया माइनॉरिटी फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष एस एम आसिफ ने भी इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। जिसमे कहा गया है कि डॉक्टर कफील खान के ऊपर लगा एनएसए गैर कानूनी था। आसिफ ने कहा है।की इससे साबित होता है।की यूपी की योगी सरकार अल्पसंख्यकों के खिलाफ कानून का दुरुपयोग करके अपने राजनैतिक लाभ ले रही है। उन्होंने कहा कि यूपी में कानून व्यवस्था की हालत अब खस्ता हो चुकी है।क्योंकि जब कानून के रखवाले ही कानून का दुरपयोग करेगे तो उस राज्य का तो ऊपर वाला ही मालिक है। गौरतलब है कि हाई कोर्ट ने एनएसए हटाने का आदेश जारी करते हुए डॉक्टर कफील खान को तुरंत रिहा करने का निर्देश दिया है।

बता दें कि डॉ. कफील पर एनएसए लगाने को चुनौती दी गई थी। डॉ कफील की मां नुजहत परवीन की ओर से बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की गई थी।

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