जनरल बिपिन रावत आज सेना प्रमुख के पद से रिटायर हो गए हैं. नए साल के पहले दिन वह अब चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के रूप में पदभार संभालेंगे. वह देश के पहले CDS यानी चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बन गए हैं. इस पद पर आते ही उनके पास तीनों सेनाओं को आदेश जारी करने का अधिकार मिल गया है. सेना के तीनों अंगों के बीच तालमेल के अलावा युद्ध के दौरान सिंगल प्वॉइंट आदेश देने का भी अधिकार होगा. मतलब ये है कि अब तीनों सेनाओं को एक ही आदेश जारी होगा. साथ ही उन्‍हें साइबर और स्‍पेस कमांड का भी जिम्‍मा दिया जाएगा. करगिल जंग के बाद बनी कमेटी ने सीडीएस की सिफारिश की थी ताकि सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल हो सके.

बता दें कि नरेंद्र मोदी ने इसी साल 15 अगस्त को लालकिले से दिए अपने भाषण में सीडीएस बनाने की घोषणा की थी. उसके बाद एक हाई पावर कमेटी बनाई गई थी जिसकी रिपोर्ट के बाद ही सीडीएस का ऐलान हुआ है.  जनरल रावत के पक्ष में ये बात जाती है कि उनकी अगुवाई में जम्मू और कश्मीर में आतंकवाद का लगभग सफाया हो गया है. इससे पहले जनरल रावत के पास अशांत इलाको में काम करने का लंबा अनुभव है और सबसे बड़ी बात कि वो सरकार के भरोसेमंद है. जनरल रावत की जगह नए थल सेनाध्यक्ष मनोज मुकुंद नरवाणे होंगे.

वहीं मंगलवार को रिटायर होने से पहले उन्होंने वॉर मेमोरियल पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी और मीडिया से भी बात की. बिपिन रावत बोले कि उन्हें नहीं पता था कि वह चीफ ऑफ आर्मी डिफेंस बनाए जाएंगे, लेकिन अब वह इसके लिए रणनीति तैयार करेंगे. साथ ही मीडिया से मुखातिब होते हुए बिपिन रावत बोले, चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ की जिम्मेदारी काफी बड़ी होती है, ऐसे में मेरा ध्यान सिर्फ इसी पर था. मुझे अगर कोई नया ओहदा दिया गया है, तो मैं उसपर काम करूंगा. लेकिन अगर मुझे कहा जाएगा कि मैं COAS देखते हुए CDS की कार्रवाई करेंगे, तो ऐसा नहीं हुआ था कि मैं अभी तक इसी पर ध्यान दे रहा था.

बुधवार को बिपिन रावत देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के तौर पर नियुक्त होंगे. बता दें कि एक लंबी मांग के बाद भारत सरकार की ओर से CDS के पद को मंजूरी दी गई है. चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की जिम्मेदारी तीनों सेनाओं से जुड़े मामलों में रक्षामंत्री को सलाह देना होगा.