महाराष्ट्र की राजनीति में बिग बॉस माने जाने वाले शरद पवार के सामने फेल हो गया बीजेपी का सियासी खेल. महाराष्ट्र के सियासी संग्राम के बीच संविधान दिवस के दिन बीजेपी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा. इस का नतीजा यह हुआ कि देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री पद से और अजित पवार को डिप्टी सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा. महाराष्ट्र की सियासत के बेताज बादशाह कहे जाने वाले एनसीपी प्रमुख शरद पवार के आगे बीजेपी के चाणक्य की चाल भी काम नहीं आ सकी. इससे साबित हो गया कि महाराष्ट्र के बाहुबली सिर्फ शरद पवार ही हैं.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आगे देश के एक से बढ़कर एक नेता अपना सियासी वजूद को बचाकर नहीं रख सके. पर महाराष्ट्र की सियासत में इन दोनों नेताओं का सियासी जादू फीका पड़ गया. ऐसे में अकेले ही  78 वर्षीय शरद पवार ने दिल्ली बनाम महाराष्ट्र की सियासी लकीर खींच दी और बारिश में भीगते हुए चुनाव प्रचार किया. इसका नतीजा रहा कि एनसीपी किंगमेकर बनकर उभरी. हालांकि बीजेपी-शिवसेना को स्पष्ट बहुमत मिला था, लेकिन दोनों के बीच कुर्सी की लड़ाई में शरद पवार ने अपने सियासी हुनर का इस्तेमाल किया. उन्होंने खामोशी से शिवसेना के कंधे पर हाथ रखा. इससे शिवसेना के हौसले इतने बुलंद हो गए कि उसने बीजेपी से दशकों पुरानी दोस्ती तोड़ ली.

शिवसेना ने महाराष्ट्र में कांग्रेस-एनसीपी के साथ आने के लिए अपना हाथ बढ़ाया, लेकिन शरद पवार अपने पत्ते आखिरी वक्त तक नहीं खोल रहे थे. इसका नतीजा यह हुआ कि गवर्नर को महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा. राष्ट्रपति शासन लगने के बाद भी कांग्रेस-एनसीपी-शिवसेना की बीच सियासी खिचड़ी पकती रही. कांग्रेस की ओर से भी शिवसेना के साथ बात शरद पवार ही करते रहे थे. तीनों पार्टियों के बीच कई दौर की बैठक के बाद 22 नवंबर को सरकार बनाने का फॉर्मूला तय हुआ.

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इससे पहले की कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना सरकार बनाने का दावा राज्यपाल को पेश करती, उससे पहले ही शनिवार (23 नवंबर) को बीजेपी ने शरद पवार के भतीजे अजित पवार को अपने साथ मिलाकर सबको चौंका कर दिया. महाराष्ट्र में रातोरात राष्ट्रपति शासन हटा गया और शनिवार की सुबह मुंबई के लोग सही से सोकर उठ भी नहीं पाए थे कि देवेंद्र फडणवी ने मुख्यमंत्री पद की और अजित पवार ने डिप्टी सीएम की शपथ थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित बीजेपी के तामाम दिग्गज नेताओं ने देवेंद्र फडणवीस सरकार को बधाई तक दे दी थी.

जहां शनिवार को अजित पवार के बीजेपी खेमे में जाने के बाद कांग्रेस-एनसीपी-शिवसेना बैकफुट पर नजर आ रही थी. ऐसे में शरद पवार ने मुंबई में रहकर कमान संभाली. हालांकि बीजेपी यह दावा करती रही कि हमारे पास 170 विधायकों का समर्थन है. इसके बावजूद शरद पवार ने पहले अजित पवार  के साथ जाने वाले एनसीपी विधायकों को वापस लाने की कवायद शुरू की. साथ ही एनसीपी-कांग्रेस-शिवसेना ने सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई भी शुरू कर दी. ऐसा करके शरद पवार ने शिवसेना के नेतृत्व वाली सरकार बनाने का श्रेय भी अपने नाम कर लिया है, क्योंकि इस पूरे में खेल में सबसे आगे वही नजर आ रहे थे.

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