73वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राष्ट्र को संबोधित किया. देश के नाम इस संबोधन में राष्ट्रपति ने कई अहम मुद्दों पर बात की. साथ ही ये भरोसा भी जताया कि जम्मू कश्मीर से हाल ही में हटाया गया अनुच्छेद 370 वहां के लोगों के लिए फायदेमंद साबित होगा.

राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा, ‘मुझे विश्वास है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए हाल ही में किए गए बदलावों से वहां के निवासी बहुत अधिक लाभान्वित होंगे. साथ ही राष्ट्रपति ने कहा, ‘सरकार, लोगों की आशाओं-आकांक्षाओं को पूरा करने में उनकी सहायता के लिए बेहतर बुनियादी सुविधाएं और सामर्थ्य उन्हें उपलब्ध करा रही है.’

राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा, ‘लोगों के जनादेश में उनकी आकांक्षाएं साफ दिखाई देती हैं. इन आकांक्षाओं को पूरा करने में सरकार अपनी भूमिका निभाती है. मेरा मानना है कि 130 करोड़ भारतवासी अपने कौशल, प्रतिभा, उद्यम और इनोवेशन के जरिए बहुत बड़े पैमाने पर विकास के और अधिक अवसर पैदा कर सकते हैं.

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राष्ट्रपति कोविंद ने संबोधन में कहा कि 2 अक्टूबर को हम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मनाएंगे. गांधीजी हमारे स्वतंत्रता संग्राम के महानायक थे. वे समाज को हर प्रकार के अन्याय से मुक्त कराने के प्रयासों में हमारे मार्गदर्शक भी थे. उन्होंने कहा कि  गांधीजी का मार्गदर्शन आज भी उतना ही प्रासंगिक है. उन्होंने हमारी आज की गंभीर चुनौतियों का अनुमान पहले ही कर लिया था. गांधीजी मानते थे कि हमें प्रकृति के संसाधनों का उपयोग विवेक के साथ करना चाहिए ताकि विकास और प्रकृति का संतुलन हमेशा बना रहे.

 

 राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि  वर्तमान में चल रहे हमारे अनेक प्रयास गांधीजी के विचारों को ही यथार्थ रूप देते हैं. अनेक कल्याणकारी कार्यक्रमों के माध्यम से हमारे देशवासियों का जीवन बेहतर बनाया जा रहा है. सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाने पर विशेष ज़ोर देना भी गांधीजी की सोच के अनुरूप है. उन्होंने कहा कि 2019 का यह साल, गुरु नानक देवजी का 550वां जयंती वर्ष भी है. वे भारत के सबसे महान संतों में से एक हैं. गुरु नानक देवजी के सभी अनुयायियों को मैं इस पावन जयंती वर्ष के लिए अपनी हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं.

राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि जिस महान पीढ़ी के लोगों ने हमें आज़ादी दिलाई, उनके लिए स्वाधीनता, केवल राजनीतिक सत्ता को हासिल करने तक सीमित नहीं थी. उनका उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति के जीवन और समाज की व्यवस्था को बेहतर बनाना भी था.