written by Suman Vashisht Bharadwaj ( उसकी खामोश आँखों में )

वो समुंद्र की गहराई जैसा है !
वो पलको के नीचे परछाई जैसा है !
मेरे एहसास को छूने वाला वो मेरे लिए खुदा की रहनुमाई जैसा है !
मान कि नहीं समझा उसने कभी मुझे अपने काबिल !
पर फिर भी वो मेरे लिए खुदा की खुदाई जैसा है!
और दर्द में भी वो मेरे, मेरे लिए बजती किसी शादी की शहनाई जैसा है !
वो ओस की बूंदों की नरमी जैसा है !
और सर्द रातों में मिलती किसी गरमाई जैसा है !
मैंने जब भी देखा आंखों में उसकी !
मैंने जब भी देखा आंखों में उसकी !
तो लगा वो मेरे दिल में छुपी किसी सच्चाई जैसा है !
मेरे एहसास को छूने वाला वो मेरे लिए खुदा की रहनुमाई जैसा है !