Written by Suman Vashisht Bharadwaj

मेरे एक अल्फाज की बेबसी को वो मेरा पूरा अंदाज समझ बैठा
कितना खुदगर्ज है वो कि मेरी एक नाकामी को अपनी जीत का आगाज़ समझ बैठा
मेरे एक अल्फाज की बेबसी को वो मेरा पूरा अंदाज समझ बैठा
कितना खुदगर्ज है वो कि मेरी एक नाकामी को अपनी जीत का आगाज़ समझ बैठा!

चोट खाई है उसके हाथों मोहब्बत में, मैं ने
और वही देखो मेरे हर जख्म को अपनी खुशी का एहसास समझ बैठा
चोट खाई है उसके हाथों मोहब्बत में,मैं ने
और वही देखो मेरे हर जख्म को अपनी खुशी का एहसास समझ बैठा!

और कितना बेदर्द है वो,कितना बेदर्द है वो
कि मेरीे हर बेबसी को अपने दिल के साज का अंदाज समझ बैठा
और कितना बेदर्द है वो,कितना बेदर्द है वो
कि मेरीे हर बेबसी को अपने दिल के साज का अंदाज समझ बैठा!

और यही है फितरत उसकी, यही है फितरत उसकी!
कि बेवफाई करकर भी उसे अपना कोई खुवशुरत आंदाज समझ बैठा!
और यही है फितरत उसकी, यही है फितरत उसकी!
कि बेवफाई करकर भी उसे अपना कोई खुवशुरत आंदाज समझ बैठा!

खुश है वो जीतकर मुझसे, खुश है वो जीत कर मुझसे!
पर हार कर भी मैं उस से, उसी को अपने दिल का एहसास समझ बैठा!
खुश है वो जीत कर मुझसे, खुश है वो जीत कर मुझसे!
पर हार कर भी मैं उस से, उसी को अपने दिल का एहसास समझ बैठा!

कितना खुदगर्ज है वो कि मेरी एक नाकामी को अपनी जीत का आगाज़ समझ बैठा!