जयपुर : जिसे गुलाबी नगर के नाम से भी जाना जाता है। जयपुर राजस्थान राज्य की राजधानी है। इस शहर की स्थापना 1728 में आमेर के महाराजा जयसिंह ने की थी। जयपुर अपनी समृद्ध भवन निर्माण-परंपरा, सरस-संस्कृति और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। यह शहर तीनों और से अरावली पर्वत से घिरा हुआ है। जयपुर शहर की पहचान यहाँ के महलों और पुराने घरों में लगे गुलाबी धौलपुरी पत्थरों से होती है।1876 में तत्कालीन महाराज सवाई रामसिंह ने इंग्लैंड की महारानी एलिज़ाबेथ, प्रिंस ऑफ वेल्स और युवराज अल्बर्ट के स्वागत में पूरे शहर को गुलाबी रंग से आच्छादित कर दिया था । तभी से जयपुर शहर का नाम गुलाबी नगरी पड़ा गया।

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जयपुर लोगों का स्वभाव
जयपुर शहर के लोग अपनी सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है। 21वी सदी में भी जयपुर की संस्कृति में पारंपरिक स्वाद देखने को मिलता है। यहाँ रहने वाले लोग सरल, स्नेही और विनम्र है। शहर का माहौल राजस्थानन के गौरवशाली अतीत, रॉयल्टी, शिष्टता को दर्शाता है।

• जयपुर का बदलाव
जयपुर की रंगत अब बदल रही है। हाल ही में जयपुर को विश्व के दस सबसे खूबसूरत शहरों में शामिल किया गया है।महानगर बनने की ओर अग्रसर जयपुर में स्वतन्त्रता के बाद कई महत्वाकांक्षी निर्माण हुए। एशिया की सबसे बडी आवासीय बस्ती मानसरोवर, राज्य का सबसे बडा सवाई मानसिंह चिकित्सालय, विधानसभा भवन, अमर जवान ज्योति, एम.आई.रोड, सेन्ट्रल पार्क और विश्व के प्रसिद्ध बैंक इसी कडी में शामिल हैं।

दर्शनीय स्थल
जयपुर शहर में बहुत से पर्यटन स्थल आकर्षण का केंद्र हैं।
सिटी पैलेस जयपुर का एक प्रमुख लैंडमार्क है। राजस्थानी व मुगल शैलियों की मिश्रित रचना एक पूर्व शाही निवास जो पुराने शहर के बीचों बीच खड़ा है। भूरे संगमरमर के स्तंभों पर टिके नक्काशीदार मेहराब, सोने व रंगीन पत्थरों की फूलों वाली आकृतियों ले अलंकृत है। सिटी पैलेस से कुछ दूरी पर स्थित है, जयपुर का जंतर मंतर। यह एक पत्थर की वेगशाला है। हवा महल इसका निर्माण 1799 ईसवी में हुआ था,हवा महल राजपूतो का मुख्य प्रमाण चिन्ह है। और यह जयपुर की पहचान भी है। इसके अलावा भगवान कृष्ण गोविंद देवजी मंदिर, सरगासूली, रामनिवास बाग, बी एम बिड़ला तारामण्डल, इसके अलावा जयपुर में और भी कई पर्यटन स्थल है जो जयपुर शहर की शान बड़ा रहे है।

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जयपुर के व्यंजन
जयपुर भ्रमण पर आये लोग अक्सर यहाँ के खाने पीने की मशहूर चीज़ों के बारे में भी जानना चाहते हैं। जैसे मथुरा की पहचान वहाँ के पेड़ों से, आगरा की पेठों से, दिल्ली की परांठों और छोलों-कुलचों से होती रही है। वैसी ही जयपुर भी एक ज़ायकेदार महानगर है। यहाँ राजस्थान में अगर दाल-बाटी-चूरमा खास डिश है तो बीकानेर के रसगुल्ले-भुजिया-पापड, जोधपुर की मावा-कचोरी, मिर्ची बड़ा और माखनिया लस्सी और कोटा की कचोरी भी अपनी जगह बड़ी प्रसिद्ध है पर जयपुर का मिश्रीमावा इनसे टक्कर लेता मिष्टान्न है। आइये- शहर के स्वाद और जायके पर एक मनोरंजक नज़र डाली जाय।

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