गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने तीन नामचीन हस्तियों को भारत रत्न देने का ऐलान किया है. इसमें पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी आलाव डॉ. भूपेन हजारिका और नानाजी देशमुख को मरणोपरांत भारत रत्न दिया जा रहा है. बता दें, भारत रत्न, देश का वो सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो असाधारण राष्ट्रीय सेवा के लिए दिया जाता है.

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी

बता दें कि कांग्रेस के बड़े नेताओं में शुमार प्रणब मुखर्जी 2012 से 2017 तक भारत के 13वें राष्ट्रपति थे. अपने पांच दशकों के राजनीतिक जीवन में वह कई अहम पदों पर रहे. यूपीए सरकार में वह रक्षा, विदेश और वित्त मंत्री भी थे.

कौन हैं नानाजी देशमुख और भूपेन हजारिका

चंडिकादास अमृतराव देशमुख को नानाजी देशमुख के नाम से भी जाना जाता है. नानाजी देशमुख भारत के एक सामाजिक कार्यकर्ता थे. उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में काम किया. भारत रत्न से पहले उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था. तो वहीं भूपेन हजारिका, असम के गीतकार, संगीतकार, गायक, कवि और फिल्म-निर्माता थे. उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर असम और पूर्वोत्तर भारत के संस्कृति और लोक संगीत को हिंदी सिनेमा के माध्यम से पेश किया था. हजारिका को 1975 में सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन के लिए राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1987), पद्मश्री (1977), और पद्मभूषण (2001) मिला था.

पीएम मोदी ने की तीनों हस्तियों की तारीफ

इस ऐलान के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने तीनों हस्तियों की तारीफ करते हुए उन्हें बधाई दी. मोदी ने कहा कि प्रणब दा हमारे समय के एक उत्कृष्ट राजनेता हैं. उन्होंने दशकों तक देश की निस्वार्थ और अथक सेवा की है. भूपेन हजारिका के गीत और संगीत पीढ़ियों से लोगों द्वारा सराहे जाते हैं. उनसे न्याय, सौहार्द और भाईचारे का संदेश जाता है. ग्रामीण विकास के लिए नानाजी देशमुख के महत्वपूर्ण योगदान ने हमारे गांवों में रहने वाले लोगों को सशक्त बनाने के एक नए प्रतिमान की राह दिखाई.

क्या है भारत रत्न सम्मान

1954 में इस सर्वोच्च नागरिक सम्मान की शुरुआत की गई थी. भारत रत्न सम्मान राष्ट्रीय सेवा के लिए दिया जाता है. इन सेवाओं में कला, साहित्य, विज्ञान, सार्वजनिक सेवा और खेल शामिल है. इसकी स्थापना तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद द्वारा की गई थी. शुरुआत में इसे मरणोपरांत नहीं देने का प्रावधान था, लेकिन 1995 में इस प्रावधान को बदला गया था.