16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में एक दिल दहलाने वाली घाटन हुई थी,  जिसने पूरे देश हो झकझोर कर रख दिया था. आज उसी निर्भया कांड की छठी बरसी है, 16 दिसंबर 2012 को निर्भया का गैंगरेप किया गया था. उस दरिंदगी के बाद निर्भया 13 दिनों तक मौत से लड़ती रही, और आखिर में निर्भया की मौत हो गई. वहीं निर्भया की मौत ने महिला सुरक्षा को लेकर एक बड़ा आंदोलन खड़ा कर दिया था. लाखों लोग सड़कों पर उतरे थे और सरकार को सख्त कानून बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा था.

इस गैंगरेप की दुनियाभर में निंदा हुई थी. देश में कहीं शांतिपूर्ण, तो कहीं उग्र प्रदर्शन भी हुए थे. दिल्ली में प्रदर्शन के उग्र होने पर मेट्रो सेवा तक बंद करनी पड़ी थी. रायसीना हिल्सरोड पर तो दिल्ली पुलिस ने आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज तक कर दिया था. वहीं घटना के दो दिन बाद संसद के दोनों सदनों में जोरदार हंगामा हुआ था. आक्रोशित संसद सदस्यों ने रेपिस्ट्स के लिए फ़ांसी की सजा तय करने मांग की थी. इसके बाद तत्कालीन गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने संसद को आश्वासन दिया कि आरोपियों को जल्द से जल्द सज़ा दिलवाने की सरकार की ओर से हर संभव कोशिश की जा रही है और राजधानी दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा के लिए हर संभव क़दम उठाए जा रहे हैं.

घटना कैसी थी, इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केंद्र ने महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ते यौन अपराध को रोकने के लिए कठोर कानून बनाने की घोषणा की. लिहाजा, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे जस्टिस जेएस वर्मा की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया गया. कमेटी ने दिन-रात काम किया. उसे ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी समेत देश-विदेश से क़रीब 80 हजार सुझाव मिले. कमेटी ने रिकॉर्ड 29 दिन में 630 पेज की रिपोर्ट 23 जनवरी 2013 को सरकार को सौंप दी. कमेटी को महिलाओं पर यौन अत्याचार करने वालों को कठोरतम दंड देने की सिफारिश की थी.

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निर्भया की छठी बरसी पर एक बार फिर लोग  सवाल उठा रहे हैं कि आख़िर निर्भया के ग़ुनहगारों को अब तक सज़ा क्यों नहीं दी गई? अखिर निर्भया के गुनहगारों को फांसी पर कब लटकाया जाएगा, वहीं निर्भया के पिता का कहना है कि रिव्यू पिटिशन खारिज होने के बाद अभी तक क्यूरेटिव पिटिशन दाखिल नहीं की गई है, और न ही दया याचिका दाखिल की गई है. ऐसे में वे इस तथ्य को लेकर अंधेरे में हैं कि आखिर निर्भया के गुनहगारों को फांसी पर कब लटकाया जाएगा. निर्भया की मां आशा देवी का कहना है कि निर्भया के अपराधी आज भी जिंदा हैं और यह कानून व्यवस्थआ की हार है. हालांकि उन्होंने अपने दुख को जब्त करते हुए यह भी कहा है कि हम सभी लड़कियों से यह कहना चाहते हैं कि वे खुद को कमजोर न समझें.

वहीं कानूनी जानकारों का कहना है कि अभी क्यूरेटिव पिटिशन और मर्सी पिटिशन दाखिल करने का कानूनी उपचार बाकी है. मामले में चारों मुजरिमों को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है और तीन मुजरिमों की रिव्यू पिटिशन खारिज हो चुकी है. जबकि चौथे अक्षय की ओर से रिव्यू पिटिशन दाखिल नहीं की गई. मुजरिमों के वकील ने बताया कि उनकी ओर से क्यूरिटिव पिटिशन दाखिल किया जाना है. वहीं एक मुजरिम ने खुद को जुवेनाइल घोषित करने की अर्जी दाखिल कर रखी है. मामला अभी कानूनी दावपेंच में उलझा हुआ है. दूसरी ओर, निर्भया के पैरंट्स का कहना है कि इन कारणों से वह अभी तक अंधेरे में हैं कि आखिर इंसाफ कब मिलेगा.

इसी साल 9 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने तीन दोषियों की रिव्यू पिटिशन खारिज करते हुए उनकी फांसी की सजा को बरकरार रखा था. सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल 4 मई को पवन, विनय और मुकेश की रिव्यू पिटिशन पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. अक्षय की ओर से रिव्यू पिटिशन नहीं डाली गई थी. अक्षय के वकील एपी सिंह ने बताया कि अक्षय की ओर से अभी रिव्यू पिटिशन दाखिल की जानी है. वहीं पवन की ओर से उन्होंने निचली अदालत में अर्जी दाखिल कर उसे जुवेनाइल घोषित करने की गुहार लगा रखी है, जो मामला अभी पेंडिंग है.

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देश की राजधानी दिल्ली पर एक बदनुमा दाग की तरह रुकी हुई यह वारदात आज भी उतनी ही दर्दनाक लगती है, जितनी 6 साल पहले थी. उस रात एक चलती बस में पांच बालिग और एक नाबालिग ने जिस तरह से निर्भया के साथ हैवानियत का खेल खेला था वह बेहद ही शर्मनाक था. लेकिन क्या आज भी निर्भया को पूरी तरह इंसाफ मिल पाया है, क्योंकि जब तक उसके दोषियों को फांसी नहीं होती तब तक  निर्भया का इंसाफ पूरा नहीं होगा, और तब तक देश में महिला सुरक्षा पर भी एक बड़ा सवाल बना रहेगा.