written by Suman Vashisht Bharadwaj

तेरी यादों को यूँ ही हंस के दिल में दवा लेता हूं मैं!
कभी रोना जो आए तो आंखों से आंसू बहा लेता हूं मैं!
दोस्तों के पूछने पर मेरे रोने की वजह तुझे आंखों का तिनका बना लेता हूं मैं!
झूठ ही सही पर कुछ देर के लिए उस तिनके को आंख में रख कर मुस्कुरा लेता हूं मैं!
इस तरह ही हंस के तेरी यादों को दिल में छुपा लेता हूं मैं!