पिछले कई महीनों की कोशिशों के बावजूद अयोध्या धर्मसभा में उम्मीद के मुताबिक़ भीड़ भले ही जमा न हुई हो, लेकिन राम मंदिर निर्माण के लिए क़ानून की मांग फिर से चर्चा में है. संसद के शीतकालीन सत्र शुरू होने के ठीक दो दिन पहले अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए अध्यादेश लाने की मांग को लेकर विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में धर्मसभा कर रहा है. वीएचपी का दावा है कि संसद के आगामी सत्र में विधेयक पेश किया जाएगा, जिससे राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा.

इस धर्मसभा को लेकर दावा किया जा रहा है कि इसमें देश भर से 5 से 10 लाख रामभक्त शामिल होंगे. कई राज्यों से रामभक्त दिल्ली पहुंच भी चुके हैं, जिन्हें अलग-अलग मठों, मंदिरों में ठहराया जा रहा है. दिल्ली में होने वाली धर्मसभा अयोध्या, नागपुर और मुंबई में हुई धर्मसभाओं की महत्वपूर्ण कड़ी है.

वीएचपी के महासचिव सुरेंद्र जैन

वीएचपी के महासचिव सुरेंद्र जैन का दावा है कि इस धर्मसभा से उन लोगों का हृदय परिवर्तन होगा जो मानते हैं कि संसद के शीतकालीन सत्र में राम मंदिर पर विधेयक लाना संभव नहीं है. साथ ही सुरेंद्र जैन का कहना है कि यदि किसी वजह से शीतकालीन सत्र में राम मंदिर को लेकर विधेयक नहीं आता है, तो प्रयाग में होने वाले महाकुंभ में होने वाली आगामी धर्म संसद में भविष्य की रणनीति तय होगी. बता दें कि महाकुंभ में 31 जनवरी से 1 फरवरी तक दो दिवसीय धर्म संसद होनी हैं जिसमें राम मंदिर समेत कई अन्य मुद्दों पर धर्मादेश जारी होगा. वहीं हिंदू धर्मगुरु स्वामी राम भद्राचार्य ने कहा है कि मैं सरकार से आश्वासन के आधार पर कह रहा हूं कि प्रधानमंत्री भव्य मंदिर निर्माण के लिए रास्ता प्रशस्त करेंगे.

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बल्कि राजस्थान के अलवर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र के नागपुर में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भी राम मंदिर से संबंधित बयान दिए थे. लोकसभा में कर्नाटक के धारवाड़ से पार्टी सांसद प्रह्लाद वेंकटेश जोशी और राज्यसभा में मनोनीत सदस्य राकेश सिन्हा की ओर से तैयार प्राइवेट मेंबर्स बिल्स को भी इसी का हिस्सा माना जा रहा है. हालांकि राकेश सिन्हा का कहना है कि दूसरे राजनीतिक दलों से सकारात्मक जवाब न मिलने के कारण उन्होंने फ़िलहाल अपना बिल सदन में पेश करने का इरादा स्थगित कर दिया है, लेकिन प्रह्लाद वेंकटेश जोशी का मसौदा लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय में भेजा जा चुका है. वहीं प्रह्लाद वेंकटेश जोशी का कहना है लोकसभा अध्यक्ष के यहां से जवाब का इंतज़ार है, जिससे ये तय होगा कि बिल पर शीतकालीन सत्र के दौरान बहस होगी या नहीं. उन्होंने कहा कि उनके संसदीय क्षेत्र में राम मंदिर निर्माण को लेकर बार-बार मांग उठती रहती है, जिससे उन्हें प्राइवेट मेम्बर बिल लाने का विचार आया. ये उनकी निजी पहल है और इसका उनकी पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है.

लेकिन मंदिर पर क़ानून या अध्यादेश लाए जाने की संभावना महज़ चंद दावों और ‘संतो का ये धर्मादेश, क़ानून बनाओ या अध्यादेश,’ और ‘संविधान से बने, विधान से बने’ जैसे नारों के आधार पर नहीं जताए जा रहे हैं, बल्कि इसकी कुछ और कड़ियां भी हैं.

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जो कारवां साथ हो तो मंजिलें आसान हो जाती हैं, अगर हौसला बुलंद हो तो ऊंची ऊंची इमारतें भी यूं ही खड़ी कर दी जाती है. यही हौसला दिल में लिए पिछले कई दशकों से विश्व हिंदू परिषद राम मंदिर बनवाने की राह पर अग्रसर है, लेकिन इनका सपना अभी तक किसी भी सरकार ने पूरा नहीं किया है, अब देखना है कि 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले क्या बीजेपी इन्हें यह तोहफा दे पाती है या नहीं.