जैसे की हम सब जानते है कि देश में 2019 में चुनाव का महासंग्राम शुरू होने वाला है. जहां इस चुनावी महासंग्राम को लेकर सभी राजनीतिक पार्टियों में उत्सुकता और बेचैनी देखने को मिल रही है.  तो वहीं जनता के सामने भी 2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर कई सवाल है.  जिनके जवाब ढूंढना खुद जनता के लिए भी मुश्किल का सबक बना हुआ है.  जहां एक तरफ कांग्रेस है जिसने अपने 70 साल के राज में कई  ऐसे फैसले लिए जिस वजह से आज वो सत्ता से दूर है, तो वहीं वर्तमान की बीजेपी सरकार द्वारा किए गए कई फैसले जो जनता को रास नहीं आए, जैसे GST और नोटबंदी यह दोनों ही फैसले जनता को बिल्कुल रास नहीं आए.  इसके अलावा भी बीजेपी के कई ऐसे वादे जिससे जनता संतुष्ट नजर नहीं आ रही है. ऐसे में देश की जनता किसे चुनेंगी और किस पर भरोसा करेगी यह भी बड़ा सवाल है.  लेकिन 2019 के महासंग्राम से पहले यह देखना भी दिलचस्प होगा कि पांच राज्यों के युद्ध में विजेता को घोषित होगा.

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जी हां देश के पांच राज्य राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, मिजोरम और तेलंगाना में चुनाव हो रहे है, जिनके नतीजे 11 दिसंबर को घोषित होंगे. बता दें कि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में वर्तमान में बीजेपी की सत्ता है, बल्कि छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में तो पिछले 15 वर्षों से बीजेपी की ही सरकार है. तो वहीं मिजोरम में कांग्रेस का सत्ता पर काबिज है. लेकिन इस बार राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़, तीनों ही सूबों में बीजेपी को बड़ा झटका लग सकता है.

राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ में क्या हैं सियासी हालात?

राजस्थान में पिछले चुनाव में बीजेपी ने जीत दर्ज की थी. इस बार के चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी में सीधी टक्कर है. पीएम मोदी ने राजस्थान में चुनावी बिगुल भी फूंक दिया है. राज्य में विधानसभा की कुल 200 सीटें हैं. पिछले चुनाव में बीजेपी ने 160 सीटें जीती थीं. कांग्रेस को 25 और अन्य को 15 सीटें मिली थीं लेकिन इस बार राजस्थान के रण में कांग्रेस, बीजेपी से जादा दम में दिख रही है. वहीं मध्य प्रदेश में पिछले 15 बरसों से बीजेपी का लगातार शासन है. नवंबर 2005 में मुख्यमंत्री बने शिवराज सिंह चौहान का यह तीसरा कार्यकाल है, और  इसबार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने अपनी सत्ता बचाने की चुनौती है, क्योंकि इसबार एमपी में बीजेपी को कांग्रेस तगड़ी चुनौती दे रही है, और कांग्रेस इस बार सत्ता के वनवास को खत्म करने की पूरी कोशिश में हैं.

इसके अलावा अगर बात करें छत्तीसगढ़ कि तो साल 2000 में अस्तित्व में आए छत्तीसगढ़ में शुरुआती तीन साल कांग्रेस की सरकार रही, जिसके मुख्यमंत्री अजीत जोगी थे. दिसंबर 2003 से यहां बीजेपी सत्ता में है और डॉ. रमन सिंह हर बार मुख्यमंत्री बने हैं. शिवराज की तरह रमन भी तीसरी बार मुख्यमंत्री बने हैं, लेकिन टाइमिंग के मामले में वह सीनियर हैं. शिवराज जहां करीब 13 साल से सीएम हैं, वहीं रमन करीब 15 साल से. छत्तीसगढ़ के सियासी हालात भी कमोबेश राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे दिखाई दे रहे हैं. यहां बीजेपी के खिलाफ एंटी-इन्कम्बेंसी का अच्छा इस्तेमाल किया जा सकता है, मगर कांग्रेस को इस पर ध्यान देना होगा.

इस के साथ ही अगर मिजोरम की बात कि जाए तो नॉर्थ-ईस्ट का राज्य मिजोरम 1987 में अस्तित्व में आया था. यहां पहली बार 1989 में कांग्रेस की सरकार बनी थी, जो लगातार दो बार सत्ता में रही. फिर दो बार मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) की सरकार रही. 2008 से कांग्रेस फिर यहां सत्ता में है. कांग्रेस के चार कार्यकाल में मुख्यमंत्री हर बार लाल थनहवला रहे हैं, जबकि MNF की दो सरकारों में मुख्यमंत्री ज़ोरामथंगा रहे. इन दोनों के अलावा इसबार मिजोरम में बीजेपी के प्रदर्शन पर भी निगाह रहेगी. क्योंकि मिजोरम बीजेपी अभी तक एक बार भी सत्ता हासिल नहीं कर पाई है.

वहीं तेलंगाना का पिछला विधानसभा चुनाव आंध्र प्रदेश के विधानसभा और देश के लोकसभा चुनाव के साथ हुआ था. इससे कुछ महीने पहले ही आंध्र और तेलंगाना को अलग किया गया था और हैदराबाद इनकी संयुक्त राजधानी बनाई गई थी. यहां TRS ने एकतरफा जीत दर्ज की थी और कांग्रेस बड़े अंतर से दूसरे नंबर पर रही. इस बार के चुनाव में इन दोनों पार्टियों के अलावा असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM और आंध्र की सत्ताधारी पार्टी तेलुगु देशम पार्टी (TDP) को देखना दिलचस्प होगा.

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अगर देखे तो इन तीन राज्योंग में जीत कांग्रेस की बड़ी कामयाबी होगी और लोकसभा से पहले उसके हौसले बुलंद हो सकते हैं. देश की यह सबसे पुरानी पार्टी अभी केवल 4 राज्योंब में सत्ता में हैं. अगले साल के आम चुनाव से पहले इन राज्यों  में होने वाले विधानसभा चुनाव को सत्ता का सेमीफाइनल माना जा रहा है. इन तीनों राज्यों  में कुल मिलाकर 65 लोकसभा सीटें हैं. अब आगामी वीधानसभा चुनाव ही 2019 के लोकसभा के चुनाव का भविष्य तय करेंगी.