बेरोजगारी अब हमारे देश में एक ऐसी समस्या बनती जा रही है. जिसके चलते नौजवान अपनी जान देने के लिए मजबूर हो रहे हैं. डिग्री हाथ में होने के बावजूद भी नौकरी न मिलना. बचपन से दिल में कुछ बनने की उम्मीद लिए बड़ा होना और बड़े होते ही उन उम्मीदों का बेरोजगारी में बदल जाना एक ऐसी तकलीफ देता है, जिसकी वजह से बेरोजगार नौजवान आत्महत्या जैसे कदम उठाने से भी नहीं कतराते. बेरोजगारी का एक ऐसा ही मामला राजस्थान के अलवर में देखने को मिला.

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राजस्थान में बेरोजगारी का भयावह चेहरा सामने आया, जहां अलवर शहर में बुधवार को 6 दोस्तों ने नौकरी नहीं मिलने से परेशान होकर जान देने की प्लानिंग की. और इसके बाद उनमें से चार लोग शहर के एफसीआई गोदाम के पास ट्रेन के आगे कूद गए. इनमें से 3 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक गंभीर रूप से घायल हो गया. बाकी दो दोस्तों ने अंतिम समय में आत्महत्या के लिए ट्रेन के आगे कूदने का फैसला बदल दिया, जिसके चलते उनकी जान बच गई.

बता दें कि चश्मदीदों के मुताबिक आत्महत्या करने जा रहे युवकों ने कहा कि नौकरी तो लगेगी नहीं, तो फिर जीवित रह कर क्या करेंगे? वहीं आत्महत्या के फैसले से पिछे हटने वाले दोनों युवकों ने बताया कि आत्महत्या से पहले सभी का कहना था कि नौकरी तो लगेगी नहीं, जिसके बिना जिंदगी गुजारना मुश्किल है. ऐसे में जीवित रह कर क्या करेंगे? पुलिस इन दोनों युवकों से पूछताछ कर रही है. आत्महत्या करने वाले युवकों में से एक सत्यनारायण मीणा ने घटना से कुछ घंटे पहले अपने फेसबुक अकाउंट पर हत्या का वीडियो- ‘माही द किलर’ को अपलोड किया था.  इस वीडियो में युवक की हत्या का दृश्य है.

तो वहीं एसपी राजेंद्र सिंह के मुताबिक 24 वर्षीय मनोज मीणा, 22 वर्षीय सत्य नारायण मीणा, 17 वर्षीय राज मीणा और 22 वर्षीय अभिषेक मीणा सूबे के अलवर में पढ़ाई कर रहे थे. ये चारों दोस्त अपने दो अन्य दोस्त संतोष मीणा और राहुल मीणा के साथ मिलकर जिले के श्याम रेलवे ट्रैक के पास बैठकर बातें कर रहे थे. उसी दौरान इन सभी 6 युवकों के दिमाग में यह बात आई कि बिना नौकरी के जिंदगी गुजारना मुश्किल है. लिहाजा मौत को गले लगा लेना ही अच्छा है. इसके बाद 4 दोस्तों ने यह दर्दनाक कदम उठा लिया. हालांकि संतोष मीणा और राहुल मीणा ने अंतिम समय में अपना फैसला बदल लिया और उनकी जान बच गई.

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इस घटना से यह तो साबित हो गया की, आज भी  बेरोजगारी देश में सबसे बड़ी समस्या है, लेकिन इस समस्या का हल ना तो सरकार के पास है, और नहीं देश की बदलती व्यवस्था के पास है. हां देश में हर पांच साल बाद सरकार जरुर बदलती है, लेकिन रोजगार को लेकर हालात जस के तस रहते है. जी हां 70 साल पहले भी देश में बेरोजगारी थी, और आज भी है. आगर कुछ बदला है तो वो है बेरोजगारी का आंकड़ा जो पहले से दोगुना हो गया है