#Me Too कहने को तो यह सिर्फ दो अल्फाज हैं, पर इन दो अल्फाज ने पूरी दुनियां को हिलाकर रख दिया हैं. #Me Too एक ऐसा कैंपेन बन गया है जिसके ज़रिये महिलाएं अपने ऊपर हुए योन शोषण के बारे में खुलकर बोलने का साहस दिखा रही हैं. वही शायद ये कहना बिलकुल गलत नहीं होगा कि इस अदभुद कैंपेन के कारण कई बड़े राज़ो पर से पर्दा भी उठ रहा है. #Me Too में ऐसा भी देखा जा रहा हैं कि सोशल मीडिया पर महिलाएं अपने बुरे अनुभवों को शेयर करते हुए बता रही हैं कि किस तरह से वर्कप्लेस पर कैसे वो पुरुष के द्वार योन शोषण का शिकार हुई है. हालांकि शुरुआत में तो इस हैशटैग के जरिए मशहूर महिला ने अपने साथ हुए सेक्सुअल असॉल्ट की घटनाओं को शेयर किया, लेकिन अब इस मुहिम में आम महिलाएं भी अपने बुरे अनुभवों शेयर कर रही हैं.

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क्या है #MeToo आंदोलन

जैसे की हम सब जनते हैं कि सबसे पहले सोशल मीडिया पर इस #MeToo की शुरुआत मशहूर हॉलीवुड एक्ट्रेस एलिसा मिलानो ने की थी. उन्होंने ये बताया कि हॉलीवुड प्रोड्यूसर हार्वे विंस्टीन ने उनका रेप किया था. जानकरी के अनुसार मिलानो ने अपने ट्विटर अकाउंट पर 16 अक्टूबर 2017 को एक ट्वीट किया. इस ट्वीट में उन्होंने ये लिखा कि  अगर आप भी कभी यौन शौषण या किसी हमले का शिकार हुए हैं तो मेरे ट्वीट पर #MeToo के साथ रिप्लाई करें. मिलानो के इस ट्वीट के बाद कई मशहूर महिला कलाकारों ने #MeToo कैंपेन के जरिए अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न के बारे में सोशल मीडिया पर बताया. ज्यादातर लोग शायद यही जानते है कि #MeToo मुहिम की शुरुआत एलिसा मिलानो ने की थी, लेकिन ये भी पूरी तरह से सच नहीं है.

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दरअसल, Me Too का जिक्र सबसे पहले साल 2006 में हुआ था. इस मुहावरे का सबसे पहले इस्तेमाल अमेरिका की मशहूर सोशल एक्टिविस्ट तराना बर्के ने की थी. बर्के ने सबसे पहले अमेरिका के फेमस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘मायस्पेस’ पर ‘Me Too’ नाम के इस मुहावरे की शुरुआत की. अपने मूल स्वरूप में यह आंदोलन यौन शोषण का शिकार हुई महिलाओं की मदद के लिए शुरू हुआ. 2006 में अमेरिकी सिविल राइट ऐक्टिविस्ट तराना बर्क ने इस आंदोलन की शुरुआत की थी. तराना बर्क खुद सेक्शुअल असॉल्ट सर्वाइवर हैं. एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि बचपन से लेकर बड़े होने तक तीन बार उनका यौन शोषण हो चुका है. मायस्पेस सोशल नेटवर्क में तराना बर्क के इन दो शब्दों ने एक आंदोलन का रूप ले लिया जिसमें यौन शोषण पीड़ितों को इस बात का अहसास दिलाने की कोशिश की गई कि आप अकेली नहीं हैं. बर्के ने Me Too नाम की एक डॉक्युमेंट्री फिल्म भी बनाई थी, जिसमें बर्के से एक 13 साल की बच्ची ने बताया कि वो भी यौन उत्पीड़न का शिकार है. जिसके बाद बर्के ने उस बच्ची से कहा  Me Too

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भारत में इस की शुरुआत बॉलीवुड एक्ट्रेस तनुश्री ने की

जहां भारत में सोशल मीडिया पर #Me Too मूवमेंट अभी हाल में ऐक्ट्रेस तनुश्री दत्ता की तरफ से नाना पाटेकर लगाए गए आरोपों के बाद शुरू हुआ. तनुश्री दत्ता ने आरोप लगाया है कि साल 2008 में आई फिल्म हॉर्न ओके प्लीज के लिए उन्हें एक आइटम नंबर शूट करना था. शूटिंग के दिन नाना पाटेकर भी सेट पर मौजूद थे. तनुश्री का आरोप है कि शूट के बीच में नाना उनके नजदीक आए और उन्होंने उन्हें गलत तरीके से छूना शुरू कर दिया. तनुश्री ने कोरियॉग्रफर गणेश आचार्य पर भी नाना का साथ देने का आरोप लगाया और दोनों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है. जिसके बाद #Me Too बवंडर में भारत की भी बॉलीवुड, राजनीति और मीडिया की कई दिग्गज हस्तियों के नाम समने आ रहे है. जिसमें सबसे पहला नाम ऐक्ट्रर नाना पाटेकर और कोरियॉग्रफर गणेश आचार्य का है तो वहीं इसके आलाव मशहूर कलाकार आलोक नाथ, मंत्री एमजे अकबर जैसे नाम भी सामने आए है

ये कहना गलत नहीं होगा कि यौन शोषण पर #Me Too एक ऐसी मुहिम है जिसने पूरी दुनिया की महिलाओं को ना केवल यौन शोषण के खिलाफ बोलने की हिम्मत दी है, बल्कि उन्हें एक मंच पर भी खड़ा किया है. इस मुहिम की मदद से इस पितृसत्तात्मक समाज की तमाम बदरंग कहानियां सामने आ रही हैं. इन कहानियों से महिलाओं के अंदर का डर खत्म हो रहा है और उन्हें भविष्य में इसकी मदद से एक अच्छा समाज मिलेगा.