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निर्भया गैंगरेप केस में सभी दोषियों की फांसी की सजा बरकरार, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका

 

 

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साल 2012 में दिल्ली में हुए निर्भया गैंगरेप केस में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है. इस केस के चार आरोपियों में से तीन की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज करते हुए उनकी फांसी की सजा बरकार रखी है. फैसले से पहले निर्भया का परिवार अपने वकील के साथ कोर्ट में पहुंचा था. निर्भया के माता-पिता ने कड़ी से कड़ी सजा देने की अपील की थी.

निर्भया के गुनहगार, जिन्हें होगी फांसी की सजा

मुकेश सिंह– मुकेश सिंह बस का क्लीनर था. वारदात की रात वह भी बस में सवार था. गैंगरेप के बाद मुकेश ने निर्भया और उसके दोस्त को बुरी तरह पीटा था. वह अभी तिहाड़ जेल में बंद है.

विनय शर्मा– विनय पेशे से फिटनेस ट्रेनर था. वारदात के वक्त वह बस चला रहा था. विनय भी तिहाड़ जेल में कैद है. राम सिंह के खुदकुशी करने के बाद उसने भी जेल के भीतर आत्‍महत्‍या की कोशिश की थी, लेकिन बच गया.

अक्षय ठाकुर- बिहार का रहने वाला अक्षय ठाकुर अपनी पढ़ाई छोड़कर घर से भागकर दिल्ली आ गया था. यहां उसकी दोस्ती राम सिंह से हुई थी. उसके सहारे वह फल बेचने वाले पवन गुप्ता से भी घुल-मिल गया था. अक्षय ठाकुर भी तिहाड़ जेल में कैद है. अक्षय ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर नहीं की थी.

पवन गुप्ता– पवन गुप्ता दिल्ली में फल बेचने का काम करता था. 16 दिसंबर को गैंगरेप के समय यह भी अपने दोस्तों के साथ उस बस में मौजूद था. पवन भी तिहाड़ जेल में बंद है. वह जेल में रहकर ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहा है.

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16 दिसंबर, 2012: दिल्ली के मुनीरका में 6 लोगों ने चलती बस में पैरामेडिकल की छात्रा से गैंगरेप किया. इसके बाद दरिंदगी की वो सारी हदें पार गए, जिसे देखकर कोई दरिंदा भी दहशत में आ जाए. वारदात के वक्त पीड़िता का दोस्त भी बस में था. दोषियों ने उसके साथ भी मारपीट की थी. इसके बाद युवती और दोस्त को चलती बस से बाहर फेंक दिया था.

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